सपा सांसद इकरा हसन पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप

Saharanpur News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में समाजवादी पार्टी की तेज-तर्रार सांसद इकरा हसन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सहारनपुर पुलिस ने सपा सांसद इकरा हसन समेत 6 नामजद और 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह पूरी कार्रवाई डीआईजी कार्यालय के बाहर सड़क जाम करने, अव्यवस्था फैलाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों के तहत की गई है। सिविल लाइन चौकी प्रभारी की तहरीर पर थाना सदर बाजार में यह एफआईआर दर्ज हुई है।

पूर्व राज्य मंत्री मांगेराम कश्यप भी नामजद

इस हाई-प्रोफाइल एफआईआर में सांसद इकरा हसन के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व राज्य मंत्री रहे मांगेराम कश्यप, शीशपाल, सत्यपाल, अनुज, तेजपाल सिंह और अजय को नामजद किया गया है। पूरा विवाद शामली जिले के दशाले गांव में हुए मोनू कश्यप हत्याकांड से जुड़ा है। 21 अप्रैल को हुई इस हत्या के मामले में पीड़ित परिवार का आरोप था कि पुलिस उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। इसी सिलसिले में 19 मई को सांसद इकरा हसन पीड़ित परिवार और भारी संख्या में समर्थकों के साथ डीआईजी दफ्तर इंसाफ की गुहार लगाने पहुंची थीं।

थाने के बाहर आधी रात तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा

डीआईजी कार्यालय पर सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए इकरा हसन वहीं धरने पर बैठ गईं, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर करीब 10 मिनट तक महिला थाने में रखा। इसी दौरान पुलिस ने पूर्व राज्य मंत्री मांगेराम कश्यप समेत पांच लोगों को शांति भंग की धारा में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अपने समर्थकों की गिरफ्तारी से नाराज सांसद इकरा हसन सीधे सदर बाजार थाने पहुंचीं और बाहर सड़क पर बैठकर देर रात तक धरना दिया।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई। गुस्से में सांसद ने अधिकारियों से कहा, अगर पीड़ितों के लिए न्याय मांगना अपराध है, तो पुलिस उन्हें भी जेल भेज दे। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह द्वारा गिरफ्तार नेताओं की रिहाई के आश्वासन के बाद रात करीब साढ़े नौ बजे धरना खत्म हुआ और अगले दिन सभी को जेल से रिहा कर दिया गया।

पुलिस बोली- कानून तोड़ने पर हुई कार्रवाई

सांसद इकरा हसन और अन्य नेताओं पर मुकदमा दर्ज होने के बाद वेस्ट यूपी के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे पूरी तरह से तानाशाही और जनता की आवाज को दबाने वाली दमनकारी कार्रवाई करार दिया है। वहीं दूसरी तरफ, पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि प्रदर्शन के नाम पर कानून व्यवस्था को हाथ में लेने, सड़क जाम कर आम जनता को परेशान करने और सरकारी काम में अड़ंगा डालने की वजह से यह विधिक कार्रवाई की गई है।

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