UP गन कल्चर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, राजा भैया, धनंजय और बृजभूषण सिंह समेत कई दिग्गजों के लाइसेंस पर मांगा जवाब

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश में तेजी से पैर पसार रहे ‘गन कल्चर’ और शस्त्र लाइसेंसों के खुलेआम दुरुपयोग पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने एक अहम टिप्पणी में कहा कि हथियारों का सार्वजनिक तौर पर नुमाइश करना समाज में खौफ और असुरक्षा की भावना पैदा करता है, जिससे कानून का शासन कमजोर होता है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने जय शंकर उर्फ बैरिस्टर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई करते हुए योगी सरकार, सूबे के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और कप्तानों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में पूछा है कि आखिर आपराधिक छवि वाले लोगों को किस आधार पर हथियार के लाइसेंस बांट दिए गए?

6 हजार से अधिक अपराधियों के पास सरकारी बंदूकें

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस समय कुल 10 लाख 8 हजार 953 वैध हथियार लाइसेंस मौजूद हैं। वहीं, 23 हजार से अधिक नए आवेदन और 1,738 अपीलें अभी भी अधिकारियों के पास लंबित हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रदेश में 6,062 ऐसे लोगों को हथियार लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

अदालत ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर समाज में ‘गन कल्चर’ को बढ़ावा देने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती।

बाहुबलियों और रसूखदारों के शस्त्र लाइसेंसों की होगी समीक्षा

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के कई प्रभावशाली राजनेताओं और सामाजिक रसूख रखने वाले लोगों के आपराधिक इतिहास और उनके पास मौजूद असलहों को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा है कि गंभीर मुकदमों के बावजूद इनके लाइसेंसों की समीक्षा क्यों नहीं की गई? इसके साथ ही अदालत ने इन लोगों को मिली सरकारी सुरक्षा, गनर्स की संख्या और उनकी सुरक्षा श्रेणी की पूरी कुंडली मांगी है। जिन प्रमुख नामों को लेकर कोर्ट ने विवरण मांगा है, उनमें रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह, उदय भान सिंह, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, चुलबुल सिंह सहित अन्य नाम शामिल हैं।

26 मई को होगी अगली पेशी, तथ्य छिपाने पर नपेंगे अफसर

हाई कोर्ट ने प्रदेश के गृह विभाग समेत सभी जिम्मेदार प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई तक पूरा ब्योरा हलफनामे के साथ पेश करें। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अधिकारी ने कोर्ट से आंकड़े या तथ्य छिपाने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब इस बेहद संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 26 मई को तय की गई है।

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