महिला क्रिकेट में ऐतिहासिक कदम, BCCI ने की सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तीन स्पेशलिस्ट कोच की नियुक्ति

Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय महिला क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

बोर्ड ने बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में महिला क्रिकेटरों के लिए तीन स्पेशलिस्ट महिला कोच की नियुक्ति की घोषणा की है। यह पहली बार है जब महिला क्रिकेट के लिए इस स्तर पर विशेषज्ञ महिला कोचों की तैनाती की गई है।

BCCI ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर नूशीन अल खादीर को बॉलिंग कोच, सुनेत्रा परांजपे को बैटिंग कोच और वी रामु वनीता को फील्डिंग कोच नियुक्त किया है।

तीनों कोच अपेक्षाकृत कम उम्र में ही अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव और कोचिंग क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

नूशीन अल खादीर: बॉलिंग में अनुभव की धार

नूशीन अल खादीर ने भारत के लिए 78 वनडे मैचों में 100 विकेट झटके हैं। इसके अलावा उन्होंने 5 टेस्ट मैचों में 14 विकेट और 2 टी20 मैच भी खेले हैं।

वर्ष 2003 में वह दुनिया की नंबर-1 गेंदबाज रहीं। 2005 महिला वनडे विश्व कप में उनका इकॉनमी रेट महज 3.05 रहा था, जिसमें भारतीय टीम फाइनल तक पहुंची थी।

कोचिंग करियर में भी उन्होंने सफलता हासिल की है और बतौर हेड कोच भारतीय महिला अंडर-19 टीम को टी20 वर्ल्ड कप जिताया है।

सुनेत्रा परांजपे: बल्लेबाजी में तकनीकी मजबूती

मुंबई में जन्मी सुनेत्रा परांजपे ने भारत के लिए 3 टेस्ट और 28 वनडे मैच खेले। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 322 रन बनाए और 11 विकेट भी लिए।

2002 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाली परांजपे ने 2007 में आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। उनके अनुभव को अब युवा बल्लेबाजों की तकनीक और मानसिक मजबूती विकसित करने में इस्तेमाल किया जाएगा।

वी रामु वनीता: फील्डिंग को मिलेगी नई धार

पूर्व भारतीय खिलाड़ी वी रामु वनीता ने 6 वनडे और 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग में कदम रखा और कर्नाटक की महाराजा ट्रॉफी टी20 लीग में शिवामोगा लायंस की कोच रहीं।

इसके अलावा वह आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की मेंस स्काउट टीम और महिला प्रीमियर लीग में फील्डिंग कोच के रूप में भी काम कर चुकी हैं।

महिला क्रिकेट के लिए बड़ा संदेश

BCCI का यह फैसला महिला क्रिकेट को पेशेवर और संरचित प्रशिक्षण देने की दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

विशेषज्ञ महिला कोचों की नियुक्ति से न केवल खिलाड़ियों के कौशल में निखार आएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।

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