जस्टिस वर्मा मामला: जांच रिपोर्ट के बाद सरकार एक्शन मोड में, मानसून सत्र में हो सकती है महाभियोग पर चर्चा

Sandesh Wahak Digital Desk : जस्टिस यशवंत वर्मा के पद से इस्तीफा देने के बावजूद सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाने के संकेत दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक उनके इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आगामी संसद के मानसून सत्र में उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।

जस्टिस वर्मा मामले की जांच कर रही विशेष समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि इसमें लगाए गए आरोपों को गंभीर माना गया है। यही वजह है कि सरकार इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने के पक्ष में दिखाई दे रही है।

पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश देने की तैयारी

सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के जरिए पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की जा रही है। वहीं विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जिससे मानसून सत्र में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं।

लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत तैयार की गई जांच रिपोर्ट उचित समय पर संसद के दोनों सदनों में पेश की जाएगी। संसद का अगला मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है।

जले हुए नोट मिलने के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई, 200 से अधिक सांसदों ने किया था समर्थन

यह मामला तब सामने आया था जब जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लगने की घटना के दौरान कथित तौर पर एक स्टोर रूम से बड़ी मात्रा में जले हुए नोट बरामद किए गए थे। उस समय वह दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे, बाद में उन्हें उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश द्वारा गठित आंतरिक समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि जिस स्टोर रूम से नकदी मिलने की बात सामने आई, उस पर जस्टिस वर्मा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था। इसके बाद जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, संसद में संभावित कार्रवाई से पहले जस्टिस वर्मा ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बावजूद इसके, उनका नाम अब भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सूची में दर्ज बताया जा रहा है।

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