बांकीपुर उपचुनाव में उतरेंगे प्रशांत किशोर, बीजेपी के अभेद्य गढ़ को ढहाने का किया दावा

Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करने वाली प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने एक बार फिर चुनावी समर में उतरने का ऐलान कर दिया है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने पटना की वीआईपी सीट बांकीपुर पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए हुंकार भर दी है। यह सीट भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। पीके ने दावा किया है कि जन सुराज इस बार पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी और भाजपा के दशकों पुराने इस गढ़ को ध्वस्त कर देगी।

45 साल के एकछत्र पारिवारिक राज को चुनौती देगी जन सुराज

शिवहर में मीडियाकर्मियों से रूबरू होते हुए जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा को अगर कोई सीधी और कड़ी टक्कर दे सकता है, तो वह सिर्फ उनकी पार्टी है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस इस सीट पर बार-बार मुंह की खाती रही हैं। पिछले 40-45 वर्षों से इस सीट पर एक ही परिवार का कब्जा रहा है, लेकिन इस बार जन सुराज इस राजनीतिक किले को भेदने का काम करेगी।

पिता-पुत्र का रहा है इस सीट पर दबदबा

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट को भाजपा का सबसे सुरक्षित और मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 2008 के परिसीमन से पहले इसे पटना पश्चिम सीट के नाम से जाना जाता था। यहाँ से नितिन नवीन लगातार 5 बार विधायक चुने गए हैं। उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी लगातार 4 बार इसी क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

पिछले चुनाव में जब्त हुई थी जमानत

साल 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने राजद की रेखा कुमारी को करीब 51 हजार वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। उस चुनाव में जन सुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी को मात्र 7,717 वोट मिले थे और उनकी जमानत तक जब्त हो गई थी। कुल 238 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पीके की पार्टी को एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी। अब नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद नियमों के मुताबिक 6 महीने के भीतर चुनाव होने हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार अपने राष्ट्रीय मीडिया को-ऑर्डिनेटर और एमएलसी संजय मयूख को बांकीपुर के चुनावी मैदान में उतार सकती है, जिनका एमएलसी कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है।

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