टीएमसी के 28 साल के सफर में सबसे बड़ा संकट, जिस अंदाज में ममता ने कांग्रेस छोड़ी थी, अब वैसी ही बगावत उन्हीं की पार्टी में
Sandesh Wahak Digital Desk: तृणमूल कांग्रेस (TMC) आज अपने गठन के 28 साल के इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। पहले 58 विधायकों ने विद्रोह का बिगुल फूंका, और अब संसदीय दल में भी बगावत के बादल मंडराने लगे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस तरह से ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद एक नई पार्टी की नींव रखी थी, उसी प्रकार की स्थिति आज उनकी अपनी पार्टी में देखने को मिल रही है।

कभी ममता की करीबी रहीं काकोली घोष, अब संसद में तोड़फोड़ की तैयारी
हाल ही में कोलकाता में दर्जनों विधायकों के बागी होने के बाद अब लोकसभा में टीएमसी के कुछ सांसद भी अलग राह अपनाने को आतुर हैं। कभी ममता बनर्जी की सबसे करीबी सांसदों में गिनी जाने वाली काकोली घोष दस्तीदार इस बगावत की अगुवाई कर रही हैं। खबरों के अनुसार, बागी गुट मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंप सकता है और उसके बाद चुनाव आयोग का दरवाजा भी खटखटा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी ने साल 1998 में ठीक इसी तरह कांग्रेस छोड़कर तृणमूल का गठन किया था, जब उन्हें लगा कि कांग्रेस हाईकमान पश्चिम बंगाल में उनके वाम-विरोधी संघर्ष को रोक रहा है। वाम दलों के खिलाफ उनकी लड़ाई के बीच कांग्रेस के साथ मतभेद चरम पर पहुंच गए और फिर एक जनवरी 1998 को टीएमसी का जन्म हुआ। 2011 में इसी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके वाम दलों का 34 साल पुराना शासन खत्म कर दिया था। अब विडंबना यह है कि वही पार्टी आंतरिक विद्रोह की आग में झुलस रही है।
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