रामकथा में बोले सीएम योगी, खर-दूषण का कृत्य था लैंड जिहाद, श्रीराम के आदर्श ही लव जिहाद रोकने का रास्ता

Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को लखनऊ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा के समापन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान जनता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने हमेशा नारी की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए काम किया, जो आज के दौर में लव जिहाद जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए सबसे बड़ा और आदर्श उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा, जिसके डीएनए में हिंदुस्तान बसता हो और वह भगवान राम को न मानता हो।

कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आशीर्वाद दिया और करीब एक मिनट तक उनके कान में कुछ गुप्त चर्चा की, जिसके बाद अपनी पोटली से निकालकर एक विशेष उपहार भी भेंट किया।

खर-दूषण और मारीच चला रहे थे लैंड जिहाद का अभियान

त्रेतायुग का उदाहरण देते हुए सीएम योगी ने कहा, याद कीजिए जब दंडकारण्य में रावण का राज था, तब खर और दूषण ने पूरे क्षेत्र पर अवैध कब्जा जमा रखा था। ताड़का जैसी नकारात्मक ताकतें बक्सर तक पहुंच चुकी थीं और सब मिलकर उजाड़ मचा रहे थे। खर-दूषण और मारीच-सुबाहु जैसे राक्षस रावण के इशारे पर लैंड जिहाद का अभियान चला रहे थे, जो संतों को उनकी जगहों से जबरन हटा देते थे। उन्होंने जनता से अपील की कि रामकथा सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसके इस गूढ़ मर्म को समझने के लिए है।

रामकथा में बोले सीएम योगी, खर-दूषण का कृत्य था लैंड जिहाद

मुख्यमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें

जिसने भी राम से द्रोह किया, उसका वजूद मिट गया : सीएम योगी ने कहा कि समाज में नकारात्मक ताकतें हर युग में आएंगी, लेकिन सज्जन शक्ति को एकजुट होकर उनका सामना करना होगा। मारीच और रावण जैसे राक्षसों ने बेहद उच्च कुल और श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लिया था, लेकिन राम से बैर करने के कारण वे पशुओं की तरह मारे गए। वहीं दूसरी ओर, हनुमान जी और विभीषण को जन्म के समय सामान्य जीवन मिला था, लेकिन श्रीराम की संगति और भक्ति के कारण आज वे पूरी दुनिया में पूजनीय हैं। आज हर समस्या का अचूक समाधान हनुमान चालीसा में है।

देश के प्रति आस्था नहीं, तो यह धरती धर्मशाला नहीं : मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग भारत के प्रति अपनी निष्ठा नहीं रखते, जिन्हें यहाँ की संस्कृति और संस्कारों से कोई लगाव नहीं है, उनके लिए भारत की पावन भूमि कोई धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने आगाह किया कि कुछ ताकतें समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की साजिश रचेंगी, लेकिन हमें व्यासपीठ से मिले संदेश को समझकर एकजुट रहना होगा।

491 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मिली रामजन्मभूमि : राम मंदिर आंदोलन का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि पूज्य संतों ने प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि की मुक्ति को अपने जीवन-मरण का संकल्प बना लिया था। संतों को इससे कोई निजी लाभ नहीं चाहिए था, वे सिर्फ उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम को एक सूत्र में पिरोने वाले राम नाम की महिमा को स्थापित करना चाहते थे। इसी निस्वार्थ भावना के कारण 491 वर्षों तक यह संघर्ष चलता रहा और अंततः सफलता मिली।

जो काम कभी तुलसीदास ने किया, वही आज रामभद्राचार्य कर रहे हैं : योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की तुलना गोस्वामी तुलसीदास से करते हुए कहा कि मध्यकाल में जो काम तुलसीदास जी ने जनचेतना जगाने और विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ समाज को एकजुट करने के लिए किया था, वही महान कार्य आज जगद्गुरु कर रहे हैं। उन्होंने चित्रकूट में देश का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया और आज भी वे सिर्फ भक्तों के कल्याण और समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम के आचरण से जोड़ने के लिए रामकथा कह रहे हैं।

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