अल नीनो का साया, देश में इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को देश के मानसून को लेकर एक महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून हालांकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों तक दस्तक दे चुका है, लेकिन आगामी दिनों में देश के अन्य हिस्सों में इसकी रफ्तार काफी धीमी रहने की उम्मीद है।
आईएमडी के वैज्ञानिक प्रदीप शर्मा ने मीडिया को बताया कि अल नीनो प्रभाव अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इसके पूरे मानसून सीजन के दौरान बने रहने की प्रबल संभावना है। इसके असर से इस साल पूरे देश में सामान्य वर्षा का लगभग 98 प्रतिशत ही पानी बरसने का अनुमान है, जो कि सामान्य से कम की श्रेणी में आता है।
पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में बारिश
आईएमडी के एक अन्य वैज्ञानिक नरेश कुमार ने जानकारी दी कि पिछले दो दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बड़ा बदलाव आया है। उत्तर हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्रों में इस सिस्टम के सक्रिय होने से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पहाड़ी इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां दर्ज की गई हैं। इस दौरान क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
मौसम विभाग की चेतावनी
दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश और तेज हवाओं के मद्देनजर शनिवार को येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के पारे में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट देखी गई है। हालांकि, वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में फिर से 4 से 6 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह सामान्य स्तर के आसपास ही बना रहेगा।
महाराष्ट्र पहुंचा मानसून, पर आगे की चाल धीमी
मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दक्षिणी प्रायद्वीप के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लिया है और यह महाराष्ट्र की सीमा में प्रवेश कर चुका है। इसके अतिरिक्त, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी मानसून सक्रिय है। अगले दो से तीन दिनों के भीतर इसके बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसके बाद देश के बाकी मैदानी इलाकों में इसकी प्रगति की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।
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