बरेली में 49.44 लाख रुपये की एल्गो ट्रेडिंग साइबर ठगी का पर्दाफाश, देहरादून से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Bareilly News: जनपद के साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शेयर मार्केट में एल्गो ट्रेडिंग के नाम पर अधिक मुनाफे का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए पीड़ित के 31 लाख रुपये की राशि को विभिन्न बैंक खातों में लीन (होल्ड) करा दिया है, जिससे पीड़ित की बड़ी रकम डूबने से बच गई। इसके साथ ही तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य सरगना को भी दबोच लिया गया है।

WhatsApp लिंक भेजकर कराया फर्जी ऐप डाउनलोड

घटना की शुरुआत तब हुई जब आशीष रॉयल पार्क (डेंटल कॉलेज के पास) निवासी आलोक दुबे को एक अज्ञात व्यक्ति की कॉल आई। आरोपी ने उन्हें शेयर बाजार में निवेश पर भारी रिटर्न का लालच दिया और व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजकर एसएमसी ब्रोकिंग ऐप डाउनलोड कराया। इसके बाद केवाईसी (KYC) के नाम पर अकाउंट खुलवाकर 16 जनवरी से 30 अप्रैल, 2026 के बीच 20 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 49,43,898 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। आरोपियों ने पीड़ित से 15% कमीशन और 18% जीएसटी भी जमा करवा ली, लेकिन जब ऐप अपडेट और ऑडिट का बहाना बनाकर पैसे देने से मना किया गया, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई।

हवाला और क्रिप्टो से जुड़ा है नेटवर्क

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर थाने में मुकदमा संख्या 33/2026 पंजीकृत कर जांच शुरू की गई। इंस्पेक्टर धनंजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व वाली टीम ने 12 जून, 2026 को रेलवे स्टेशन रोड के पास से मुख्य अभियुक्त सचिन कुमार (निवासी: विश्वनाथ एन्क्लेव, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने ‘एसएमसी’ (स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट) नाम से फर्जी कंपनी बना रखी थी।

पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह ‘SMC ब्रोकिंग’ और ‘स्टार्ट इन्वेस्टमेंट’ नाम से फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबलिंक बनाकर लोगों से निवेश कराता था। जब निवेशक बड़ी रकम जमा कर देते थे, तो उनकी आईडी डीएक्टिवेट कर दी जाती थी। इस पैसे को ‘MT-5 ट्रेड ऐप’ और ‘8 कैप’ नामक पेमेंट गेटवे के जरिए क्रिप्टो करेंसी (USDT) में बदला जाता था और फिर हवाला नेटवर्क के माध्यम से कैश करा लिया जाता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी रेंट एग्रीमेंट के आधार पर अपने सरकारी दस्तावेजों के पते बार-बार बदलते थे। जांच में पता चला है कि इस ठग के खिलाफ तेलंगाना और कर्नाटक (बेंगलुरु) में भी साइबर शिकायतें दर्ज हैं।

रिपोर्ट- रंजीत बिसारिया

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