राम मंदिर चंदा विवाद में नया मोड़, फुटेज से छेड़छाड़ के मिले सुराग, SIT की पूछताछ तेज

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर दान राशि में कथित हेरफेर के मामले की जांच लगातार गहराती जा रही है। विशेष जांच दल (SIT) ने तीसरे दिन भी अयोध्या में डेरा डालकर जांच जारी रखी। जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे CCTV फुटेज के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि दान राशि में गड़बड़ी के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की गई हो सकती है।

SIT ने इस मामले में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ की है। वहीं, मंदिर की निगरानी और व्यवस्था से जुड़े कई जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान जांच टीम को संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहे हैं।

CCTV फुटेज पर बढ़ा शक

सोमवार से अयोध्या में मौजूद SIT टीम ने मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों और रिकॉर्डिंग सिस्टम की बारीकी से जांच की। सूत्रों के मुताबिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे फुटेज के साथ छेड़छाड़ की आशंका मजबूत हुई है।

जांच टीम ने कैमरों की लोकेशन, रिकॉर्डिंग प्रक्रिया और डेटा स्टोरेज सिस्टम की भी पड़ताल की है। अब यह जांच का अहम बिंदु बन गया है कि कहीं दान राशि में गड़बड़ी छिपाने के लिए रिकॉर्डिंग में बदलाव तो नहीं किया गया।

सवालों में घिरे कई जिम्मेदार

SIT ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों, कर्मचारियों, पुजारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार कई महत्वपूर्ण सवालों पर जवाब अस्पष्ट मिले हैं, जबकि कुछ मामलों में गोलमोल जवाब दिए गए।

दान राशि के रिकॉर्ड और लेखा-जोखा की जांच के दौरान भी कई विसंगतियां सामने आई हैं। इसी वजह से SIT को दस्तावेजों और बयानों का मिलान करने में अधिक समय लग रहा है।

जांच एजेंसी करीब 200 लोगों की सूची तैयार कर चुकी है। इनमें से 125 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है, जबकि कुछ लोगों को दोबारा भी बुलाया गया है।

संदिग्धों ने लिए कई नाम

मामले में पहले पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी SIT ने पूछताछ की है। उनके पास से कुछ रकम बरामद होने की बात सामने आई थी।

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में इन लोगों ने कई अन्य नामों का भी जिक्र किया है। अब SIT उनके बयानों की पुष्टि करने में जुटी है। इसी के साथ यह सवाल भी बना हुआ है कि मामले में एफआईआर जांच के दौरान दर्ज होगी या अंतिम रिपोर्ट के बाद।

बैंक की भूमिका भी जांच के घेरे में

दान राशि की गिनती और जमा प्रक्रिया में बैंक कर्मियों की भी अहम भूमिका रहती है। शुरुआती जांच में बैंक स्तर पर भी लापरवाही के संकेत मिले हैं।

हालांकि कुछ सूत्रों का कहना है कि बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के प्रभावशाली पदाधिकारियों के दबाव में रहते थे, जिसके चलते वे प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे। SIT अब इस पहलू की भी जांच कर रही है।

10 करोड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

जांच के दौरान सामने आए वित्तीय दस्तावेजों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रस्ट के रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें आधुनिक CCTV सिस्टम, निजी सुरक्षा कर्मियों और अन्य सुरक्षा इंतजाम शामिल थे।

इसके बावजूद दान राशि और बहुमूल्य वस्तुओं में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद अब सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

जमीन खरीद को लेकर भी उठे आरोप

मामले के बीच राम मंदिर ट्रस्ट पर जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोप भी फिर चर्चा में आ गए हैं।

कुछ राजनीतिक नेताओं ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट ने कई जमीनों की खरीद बाजार और सरकारी मूल्यांकन से कहीं अधिक कीमत पर की। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फिलहाल SIT की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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