Varanasi News: पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयान से भड़के काशी के मुस्लिम धर्मगुरु, बोले- पाक अपनी हद में रहे
Varanasi News: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में स्थित गंज शहीदां मस्जिद के विवाद में पड़ोसी देश पाकिस्तान की दखलअंदाजी पर स्थानीय मुस्लिम समाज और धर्मगुरुओं का गुस्सा फूट पड़ा है। दरअसल, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विवादित पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि बनारस की करीब 1,000 साल पुरानी गंज शहीदां मस्जिद सहित भारत के ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को हटाए जाने से अशांति फैलेगी। जरदारी के इस बयान की निंदा करते हुए काशी के मुस्लिम नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि पाकिस्तान अपने आंतरिक मामलों पर ध्यान दे और भारत के अंदरूनी मसलों से दूर रहे।
जहां खुद मस्जिदों में बम धमाके होते हैं, वह देश हमें न सिखाए
मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने पाकिस्तानी बयानबाजी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह हमारा घरेलू मामला है और किसी भी बाहरी मुल्क को इसमें टांग अड़ाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने भारतीय न्याय प्रणाली के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की। वहीं, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव डॉ. एसएम यासीन ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि जिस देश की खुद की मस्जिदों में बम विस्फोट होते हैं, वह पहले अपने हालात सुधारे। हम अपनी कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ रहे हैं और हमें देश की अदालत से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव डॉ. यासीन ने रेलवे प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि इस नोटिस पर न तो किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और न ही इसे जारी करने की तारीख दर्ज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस पुराने मुकदमे के खारिज होने का हवाला दिया जा रहा है, वह मस्जिद के पूर्व दिशा की बाहरी जमीन से संबंधित था, न कि मूल मस्जिद से। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि यह मस्जिद साल 1034 में निर्मित हुई थी, जिसका जिक्र 1883-84 के बंदोबस्त नक्शों में भी है, जबकि राजघाट में रेलवे का आगमन 1887 में हुआ था। ऐसे में यह साबित होता है कि मस्जिद रेलवे की स्थापना से पहले की है।
काशी स्टेशन अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट के तहत रेलवे ने जमीन को बताया अवैध
दूसरी ओर, उत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा दी गई नोटिस की समय-सीमा शनिवार (20 जून) को समाप्त हो गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि काशी रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सर्कुलेटिंग एरिया के पास स्थित यह ढांचा रेलवे की जमीन पर बना एक अवैध निर्माण है। यह क्षेत्र करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे काशी स्टेशन पुनर्विकास परियोजना (मेजर अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट) के रास्ते में आ रहा है। रेलवे के अनुसार, इस संबंध में चल रहा एक पुराना सिविल वाद कोर्ट द्वारा 28 अगस्त 2024 को खारिज किया जा चुका है। परियोजना के तहत गंगा कॉलोनी का ध्वस्तीकरण तय है, जिसके कारण रेलवे ने कमेटी से 20 जून तक खुद ही ढांचा हटाने का अनुरोध किया था। अब प्रशासन स्थानीय पुलिस और विभागों के साथ मिलकर अगली कार्रवाई की रणनीति बना रहा है।
माहौल बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
इस पूरे संवेदनशील मामले और पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयान के बाद वाराणसी पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि जरदारी के सोशल मीडिया पोस्ट और उस पर आने वाली प्रतिक्रियाओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने सचेत किया कि कुछ राष्ट्रविरोधी या असामाजिक तत्व इस मुद्दे का फायदा उठाकर शहर का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे किसी भी संदिग्ध या भड़काऊ पोस्ट करने वाले व्यक्ति को चिन्हित कर उसके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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