बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, नियामक आयोग ने जून के बिल में अतिरिक्त वसूली को ठहराया गलत
Lucknow News: विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पावर कॉरपोरेशन द्वारा जून के बिल में की गई अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) की वसूली को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया है। पावर कॉरपोरेशन के जवाब की समीक्षा करने के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि पिछले साल अप्रैल से ही की जा रही यह वसूली गलत फॉर्मूले पर आधारित थी। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, जुलाई के महीने में प्रस्तावित 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वसूली भी अब खुद-ब-खुद रद्द हो गई है। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में नियमों के दायरे में रहकर ही काम करें।
नियम क्या कहता है? नियामक आयोग ने साफ किया कि किसी भी महीने का ईंधन अधिभार सिर्फ उसी महीने की बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन (पारेषण) शुल्क के आधार पर ही तय किया जा सकता है। इसमें किसी पुराने बकाए, समायोजन या दूसरे महीने की देनदारी को शामिल करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
उपभोक्ताओं के पैसे वापस करना बड़ी चुनौती
नियामक आयोग के इस फैसले से जनता को राहत तो मिली है, लेकिन पिछले 14 महीनों से उपभोक्ताओं से वसूले गए करोड़ों रुपये को वापस करना अब आयोग और पावर कॉरपोरेशन के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन गया है।
यह पूरा मामला राज्य उपभोक्ता परिषद की सक्रियता के बाद सामने आया। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे को लोक महत्व याचिका के माध्यम से आयोग के समक्ष उठाया था। उन्होंने जून में लागू किए गए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार के आदेश पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कॉरपोरेशन ने मार्च की वास्तविक बिजली खरीद लागत में करीब 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाए और पिछली देनदारियों को नियमों के खिलाफ जाकर जोड़ दिया था, जिसे आयोग ने अब सही माना है।
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