होर्मुज में मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के बाद यूएस का ईरान पर बड़ा हवाई हमला
Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ हालिया संघर्ष विराम समझौता महज कुछ ही दिनों में खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सिंगापुर के झंडे वाले एक कमर्शियल कार्गो शिप पर ईरानी हमले के जवाब में अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। सीजफायर एग्रीमेंट लागू होने के बाद से यह वॉशिंगटन की तरफ से की गई पहली बड़ी और सीधी सैन्य कार्रवाई है।
यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 25 जून को ओमान के तट के पास से गुजर रहे मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर ईरान ने वन-वे आत्मघाती ड्रोन से हमला किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए बताया कि ईरान ने कुल चार ड्रोन दागे थे, जिनमें से तीन को अमेरिकी सेना ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि एक जहाज से जा टकराया। ट्रंप ने इसे सीजफायर का बेवकूफी भरा उल्लंघन करार दिया।
अमेरिकी बमवर्षकों ने बरपाया कहर
इस दुस्साहस का कड़ा जवाब देते हुए अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने 26 जून को ईरानी सीमा के भीतर एयरस्ट्राइक की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90 मिनट तक चले इस ऑपरेशन में ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर्स के साथ-साथ तटीय रडार स्टेशनों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी नई जंग की शुरुआत नहीं, बल्कि ईरान के हमले का करारा जवाब थी।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दी बड़ी चेतावनी
दूसरी तरफ, ईरान ने शुरुआत में जहाज पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट के पास सिरिक पोर्ट का एक टेलीकम्युनिकेशन टावर क्षतिग्रस्त हुआ है। वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी ऑपरेशन के एक हिस्से को नाकाम कर दिया और चेतावनी दी कि किसी भी अगली बेवकूफी का ऐसा कड़ा जवाब दिया जाएगा जो हमलावरों का भ्रम तोड़ देगा। फिलहाल, इस ताजा सैन्य टकराव ने परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली आगामी शांति वार्ताओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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