मन की बात का 135वां एपिसोड: सोना न खरीदने पर पीएम मोदी ने देशवासियों का जताया आभार
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 135वें एपिसोड के जरिए देश की जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों द्वारा उनकी एक खास अपील को मानने के लिए दिल से धन्यवाद दिया। दरअसल, पीएम मोदी ने पहले जनता से सोना न खरीदने का आग्रह किया था, जिसे नागरिकों ने बेहद सकारात्मक रूप से लिया।
इस सहयोग के लिए आभार जताते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों को रूढ़िवादिता और अंधविश्वास से दूर रहने की भी नसीहत दी। उन्होंने पूर्वोत्तर (नॉर्थ ईस्ट) राज्यों का जिक्र करते हुए एक ऐसी पक्षी प्रजाति के बारे में बताया, जिसे पहले लोग अशुभ मानते थे, लेकिन आज वहां की महिलाएं उसी पक्षी को बचाने के लिए एक अनूठी मुहिम चला रही हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मेघालय में पाए जाने वाले लिविंग रूट ब्रिज की जमकर सराहना की। उन्होंने इसकी खासियत बताते हुए कहा कि रबर के पेड़ों की जड़ों से इन पुलों को तैयार होने में कई दशक का समय लग जाता है। स्थानीय लोग रबर की जड़ों को बेहद धैर्य के साथ धीरे-धीरे एक निश्चित दिशा में मोड़ते हैं, जिससे समय के साथ यह एक बेहद मजबूत पुल का रूप ले लेता है। इस पुल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पुराना होने पर कमजोर होने के बजाय और ज्यादा मजबूत होता जाता है। मेघालय के स्थानीय समाज द्वारा ऐसे 120 से अधिक रूट ब्रिज की देखरेख की जा रही है, जो उनकी अटूट सृजनशीलता को दर्शाता है।
मध्य प्रदेश की महिलाओं का कमाल और स्वदेशी की अपील
प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की महिलाओं के वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन) के अनोखे प्रयास की भी सराहना की। इन महिलाओं ने पर्यावरण को बचाने के लिए अपने आस-पास के इलाकों से प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा किया और उससे खूबसूरत कृत्रिम पेड़ बनाने शुरू किए, जिनका उपयोग अब सजावट के लिए किया जा रहा है। इस पहल से न केवल सैकड़ों किलोग्राम प्लास्टिक का पुनर्चक्रण हुआ, बल्कि गंदगी भी कम हुई।
इसके साथ ही, आगामी त्योहारों को देखते हुए पीएम मोदी ने गणेश चतुर्थी से पहले देशवासियों से मिट्टी की ही मूर्तियां बनाने और खरीदने की विशेष अपील की। उन्होंने प्लास्टर ऑफ पेरिस और विदेशों से आयातित मूर्तियों का पूरी तरह बहिष्कार करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हर उत्सव के दौरान हमें पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए केवल स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

