PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, हजारों लोगों का ऐलान- ‘हम PAK का हिस्सा नहीं’

Sandesh Wahak Digital Desk: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ विरोध की लहर और तेज हो गई है। रावलकोट में हजारों लोग ईदगाह ग्राउंड में जुटे और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने खुलकर कहा कि “PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है” और इस्लामाबाद पर आर्थिक शोषण, राजनीतिक भेदभाव और जनता की आवाज दबाने के आरोप लगाए।

यह प्रदर्शन नियंत्रण रेखा (LoC) के नजदीक हुआ, जिसे पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अम्मान खान ने मंच से पाकिस्तान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,

“PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं, बल्कि पाकिस्तान को हमारी जरूरत है।”

उनके इस बयान पर मौजूद हजारों लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया और पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए।

खाने की सप्लाई रोकने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान प्रशासन ने कई इलाकों में आटा, अनाज और जरूरी सामान की सप्लाई रोक दी है।

सरदार अम्मान खान ने कहा कि महिलाओं और बच्चों तक को सीजफायर लाइन के पास धरने पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो दूसरे व्यापारिक रास्ते (Trade Routes) खुल सकते हैं, जिसका नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा।

‘यह लोगों का राज है, यहां मार्शल लॉ नहीं’

प्रदर्शन के दौरान JAAC नेताओं ने कहा कि PoK में जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा,

“यह लोगों का राज है। यहां कोई मार्शल लॉ या तानाशाही नहीं चलेगी। कश्मीर पाकिस्तान की संपत्ति नहीं है।”

नेताओं ने पाकिस्तान सरकार से जनता की मांगों को मानने और हालात सामान्य करने की अपील भी की।

आर्थिक मुद्दे से शुरू हुआ आंदोलन

PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, हजारों लोगों का ऐलान- 'हम PAK का हिस्सा नहीं'

शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, बिजली के बढ़ते बिल, गेहूं और आटे पर सब्सिडी जैसी आर्थिक मांगों को लेकर शुरू हुआ था। अब यह धीरे-धीरे राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है।

JAAC के मुताबिक आंदोलन अब 38 सूत्रीय मांगों पर आधारित है, जिनमें शामिल हैं:

  • महंगाई पर नियंत्रण
  • सस्ती बिजली
  • गेहूं और आटे पर सब्सिडी
  • बेरोजगारी का समाधान
  • राजनीतिक भेदभाव खत्म करना
  • बेहतर शासन व्यवस्था

सरकार ने दर्ज किए आतंकवाद विरोधी कानून के तहत केस

पाकिस्तानी प्रशासन ने इस आंदोलन को सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया है। संगठन के कई नेताओं, जिनमें सरदार अम्मान खान भी शामिल हैं, पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत केस दर्ज किए गए हैं।

वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर रही है, ताकि विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो बाहरी दुनिया तक न पहुंच सकें।

PoK में आखिर क्यों बढ़ रहा है गुस्सा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि PoK में बड़ी मात्रा में हाइड्रोपावर का उत्पादन होता है, लेकिन उसका फायदा पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों को मिलता है। दूसरी ओर स्थानीय लोगों को महंगी बिजली, बढ़ती महंगाई और संसाधनों के असमान बंटवारे का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद ने पहले किए गए कई समझौतों और वादों को भी पूरा नहीं किया। यही वजह है कि आर्थिक असंतोष अब बड़े राजनीतिक विरोध में बदल गया है।

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