Global Rating Agencies पर Piyush Goyal का सवाल, बोले- भारत के साथ नहीं हुआ निष्पक्ष व्यवहार

Piyush Goyal on Global Rating Agencies : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को वैश्विक रेटिंग एजेंसियों फिच, मूडीज़ और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) पर भारत के साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों ने भारत की विकास यात्रा, मजबूत आर्थिक बुनियाद, क्षमता और भविष्य को उस तरह नहीं आंका, जैसा एक रेटिंग एजेंसी को करना चाहिए था।

ब्रिटेन में आयोजित एक उद्योग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अब तक फिच, मूडीज़ और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जैसी एजेंसियां ही प्रमुख थीं, लेकिन उन्होंने भारत के साथ न्याय नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह किसी की मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात पर आश्चर्य जरूर है।

केयरएज की निष्पक्षता की सराहना

पीयूष गोयल ने मुंबई स्थित रेटिंग एजेंसी केयरएज की सराहना करते हुए कहा कि इस एजेंसी ने अपना काम पूरी निष्पक्षता के साथ किया है। उन्होंने कहा कि केयरएज ने वस्तुनिष्ठ तरीके से मूल्यांकन किया है, जबकि अन्य वैश्विक एजेंसियों ने भारत की तुलना में कमजोर अर्थव्यवस्थाओं और सीमित भविष्य वाले देशों को बेहतर रेटिंग दी है।

उन्होंने कहा कि ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को भारत से बेहतर रेटिंग दिए जाने के पीछे क्या कारण हैं, यह वही एजेंसियां बेहतर जानती हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने कई रिपोर्ट भी जारी कीं। इनमें भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की ‘इंडियन रूट्स, ब्रिटिश सॉइल’ रिपोर्ट, यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) की भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तैयार गाइड, केयरएज की रिपोर्ट और फिक्की (FICCI) की भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय साझेदारी के विकास पर आधारित रिपोर्ट शामिल थीं।

भारत की रेटिंग और सरकार का रुख

मूडीज़ ने भारत को Baa3 रेटिंग दी हुई है, जो निवेश योग्य श्रेणी की सबसे निचली रेटिंग मानी जाती है। एजेंसी का भारत के लिए आउटलुक स्थिर है। अप्रैल में मूडीज़ ने वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था। यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.9 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

पिछले कई वर्षों से भारत सरकार फिच, मूडीज़ और एसएंडपी से देश की आर्थिक स्थिति के अनुरूप बेहतर रेटिंग देने की मांग करती रही है। केंद्र सरकार का कहना रहा है कि इन एजेंसियों की मूल्यांकन पद्धति उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रही है।

क्रेडिट रेटिंग क्यों होती है महत्वपूर्ण

क्रेडिट रेटिंग किसी देश या संस्था की कर्ज चुकाने की क्षमता का आकलन होती है। यदि किसी देश की रेटिंग बेहतर होती है तो उसके लिए बाजार से कर्ज लेना आसान हो जाता है और उसे कम ब्याज दर पर उधार मिल सकता है।

सरकार को हर वर्ष अपने खर्च पूरे करने के लिए बाजार से उधार लेना पड़ता है। आय और व्यय के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। वर्ष 2025-26 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा 15.69 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसकी पूर्ति बाजार से उधार लेकर की जाएगी। बेहतर क्रेडिट रेटिंग होने पर इस उधारी की लागत भी कम हो सकती है।

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