गलत सवालों पर हाईकोर्ट सख्त, TGT परीक्षा में अब नहीं होगी गलती? आयोग से मांगा हलफनामा
Allahabad High Court: टीजीटी (TGT) अंग्रेजी परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस लापरवाही को बेहद गंभीर मानते हुए साफ संकेत दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अदालत ने परीक्षा कराने वाले आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को तलब करते हुए भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न होने की लिखित गारंटी मांगी है।
मामला उस टीजीटी (TGT) अंग्रेजी परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें करीब 25 प्रतिशत प्रश्नों पर आपत्ति उठी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में जहां एक-एक अंक उम्मीदवार की रैंक और चयन तय करता है, वहां इतने बड़े स्तर की त्रुटि को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर लापरवाही माना है। इसी वजह से अदालत ने आयोग से जवाब-तलब करते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। आयोग को शपथपत्र (Affidavit) दाखिल कर यह लिखित भरोसा देना होगा कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में गलत प्रश्न शामिल नहीं किए जाएंगे।
आयोग से मांगा पूरा एक्शन प्लान
हाईकोर्ट ने आयोग से सिर्फ हलफनामा ही नहीं, बल्कि विस्तृत कार्ययोजना भी पेश करने को कहा है। अदालत जानना चाहती है कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे।
इसके तहत प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की जवाबदेही, पेपर की बहुस्तरीय जांच व्यवस्था और अंतिम सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया जैसे सभी पहलुओं की जानकारी हलफनामे में देने के निर्देश दिए गए हैं।
छात्रों के भविष्य पर कोर्ट की चिंता
अदालत ने माना कि भर्ती परीक्षाओं में होने वाली ऐसी गलतियां सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं। कई बार पेपर में त्रुटियां, पेपर लीक या अन्य विवादों के कारण भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक अटक जाती हैं और हजारों उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ता है।
इसी पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर तय की है। इस दिन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को दोबारा अदालत में उपस्थित होना होगा। साथ ही उन्हें भविष्य में त्रुटिरहित प्रश्नपत्र सुनिश्चित करने की कार्ययोजना और लिखित हलफनामा भी कोर्ट के सामने पेश करना होगा।

