प्रयागराज में फिर बढ़ने लगा यमुना का जलस्तर, चंबल-बेतवा का दबाव बढ़ा, बाढ़ का खतरा बरकरार
Prayagraj Flood: प्रयागराज में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। चंबल (Chambal) और बेतवा (Betwa) नदियों में बढ़े पानी का दबाव अब यमुना (Yamuna River) पर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले तीन दिनों से नैनी में यमुना का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा था, लेकिन मंगलवार सुबह से इसमें गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ गई।
शाम चार बजे चार घंटे के भीतर यमुना का जलस्तर एक सेंटीमीटर बढ़ा। रात आठ बजे तक बढ़ोतरी की रफ्तार और तेज हो गई और चार घंटे में जलस्तर तीन सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। सिंचाई विभाग के मुताबिक आने वाले समय में यमुना के जलस्तर में करीब 50 सेंटीमीटर से एक मीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है।
इसका असर गंगा पर भी पड़ रहा है। छतनाग में यमुना के बढ़े दबाव से गंगा के जलस्तर में गिरावट की रफ्तार कम हो गई है। सुबह जहां करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की कमी दर्ज हो रही थी, अब यह घटकर लगभग आधा सेंटीमीटर प्रति घंटा रह गई है।
चंबल-बेतवा के बढ़े पानी से बढ़ी चिंता
पिछले दिनों चंबल और बेतवा के जलस्तर में तेज वृद्धि हुई थी। इटावा में चंबल नदी का जलस्तर सिर्फ दो दिनों में करीब 11 मीटर तक बढ़ गया था। अब इसका दबाव यमुना में दिखाई दे रहा है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता निखिल प्रसाद ने बताया कि टोंस नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिससे फिलहाल कुछ राहत है। हालांकि यमुना के बढ़ने की आशंका बनी हुई है। कानपुर बैराज से गंगा में बढ़ाया गया डिस्चार्ज भी करीब दो दिन बाद फाफामऊ में असर दिखा सकता है। बुधवार को स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। प्रशासन ने गंगा-यमुना के जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी है।
बाढ़ से 80 सड़कें क्षतिग्रस्त
बाढ़ (prayagraj Flood) और जलभराव से मेजा, करछना और कोरांव में करीब 80 सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं। पीडब्ल्यूडी (PWD) ने इनका सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें सड़क कितनी दूरी तक खराब हुई और उसकी मरम्मत पर कितना खर्च आएगा, इसका आकलन किया जा रहा है।
सर्वे रिपोर्ट सात दिनों के भीतर लखनऊ स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय भेजी जाएगी। मामूली नुकसान वाली सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी, जबकि ज्यादा क्षतिग्रस्त मार्गों के लिए विशेष मरम्मत योजना के तहत प्रस्ताव भेजा जाएगा। बजट मंजूर होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
खेतों में पानी भरने से खरीफ फसल को नुकसान
गंगा-यमुना और सहायक नदियों के बढ़े जलस्तर के साथ लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में पानी भरने से धान समेत खरीफ की दूसरी फसलें प्रभावित हुई हैं। मेजा, कोरांव और बारा तहसील में नुकसान ज्यादा होने की आशंका है।
जिला प्रशासन ने फसल क्षति का आकलन करने के लिए सभी तहसीलों में राजस्व अधिकारियों की टीमें लगाई हैं। एसडीएम और तहसीलदारों को मौके पर जाकर नुकसान का ब्योरा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मेजा में लंबे समय तक पानी भरे रहने से कई खेतों में धान खराब हुआ है, जबकि फूलपुर और दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों में भी खड़ी फसल जलभराव की चपेट में आई है।
अभी Prayagraj जिले में कुल कितने हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई और किसानों को कितने रुपये का नुकसान हुआ, इसका अंतिम सरकारी आंकड़ा सामने नहीं आया है। सर्वे पूरा होने के बाद ही राहत और कृषि निवेश अनुदान को लेकर तस्वीर साफ होगी।
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