JPSC पेपर घोटाले में झारखंड CID का एक्शन, लखनऊ और रांची से 5 आरोपी गिरफ्तार
JPSC Exam Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। झारखंड सीआईडी (CID) ने बुधवार को रांची और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक साथ छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तार किए गए लोगों का संबंध परीक्षा में कथित गड़बड़ी, एजेंट नेटवर्क और अनुचित तरीकों से चयन कराने वाले रैकेट से जुड़ा हो सकता है।
छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, डिजिटल रिकॉर्ड और अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। अब इनकी फॉरेंसिक जांच के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की जाएगी।
रांची और लखनऊ में एक साथ कार्रवाई
CID ने रांची पुलिस और लखनऊ पुलिस के सहयोग से अलग-अलग ठिकानों पर यह कार्रवाई की। जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली (Exam Scam) और एजेंट नेटवर्क से जुड़ी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों के बारे में भी अहम जानकारी मिल सकती है।
किन-किन लोगों की हुई गिरफ्तारी?
सीआईडी ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें बरियातू (रांची) निवासी उमाकांत उरांव शामिल हैं, जिन पर परीक्षा में एजेंट की भूमिका निभाने का आरोप है। कोकर निवासी रोशन केरकेट्टा पर कथित रूप से अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर परीक्षा पास करने का आरोप है।
इसके अलावा धुर्वा निवासी मनोज कुमार पर भी अनियमित तरीके से परीक्षा उत्तीर्ण करने का आरोप लगाया गया है। लखनऊ के बख्शी का तालाब निवासी रक्षक सिंह, परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। वहीं रांची के ऑड्रे हाउस में अनुबंध पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत धर्मेंद्र कुमार को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है।
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, डिजिटल डेटा और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। सीआईडी ने सभी सामग्री को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। एजेंसी को उम्मीद है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से परीक्षा घोटाले से जुड़े कई अहम सुराग सामने आ सकते हैं।
संगठित रैकेट की जांच में जुटी CID
प्रारंभिक जांच में एजेंसी को आशंका है कि परीक्षा में गड़बड़ी किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। सीआईडी अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे रैकेट में और कौन-कौन शामिल था और परीक्षा प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित किया गया।
जांच एजेंसी का मानना है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में JPSC Exam Scam मामले में और भी बड़े खुलासे तथा नई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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