E20 का असर अब खाने की थाली पर? इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से चीनी-चावल महंगा, बढ़ी चिंता
India Ethanol Policy: सरकार देश में इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाई जा रही है और E20 पेट्रोल की बिक्री जारी है। वहीं, सरकार अब E100 पेट्रोल बेचने की तैयारी भी कर रही है। दूसरी ओर, इथेनॉल बनाने में गन्ने और चावल के इस्तेमाल का असर चीनी और चावल की सप्लाई पर दिखाई देने लगा है।
इथेनॉल के लिए गन्ने के रस, टूटे चावल और मक्का का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार का तर्क है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी। हालांकि, बढ़ती चीनी कीमतों ने इस नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
15 दिन में चीनी 17 से 20 रुपये किलो महंगी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल इथेनॉल (Ethanol) बनाने में होने से चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। पिछले करीब 15 दिनों में चीनी की खुदरा कीमत 48 रुपये से बढ़कर 62-65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसका असर चाय, मिठाई, चॉकलेट, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों पर भी पड़ रहा है।
बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने थोक विक्रेताओं की स्टॉक लिमिट भी सख्त की है। हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी बेचने वाले विक्रेता अब 15 दिनों से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था अगले महीने की पहली तारीख से लागू होगी।
चावल की कीमतें भी एक साल के ऊंचे स्तर पर
इथेनॉल उत्पादन (India Ethanol Production) में टूटे चावल के इस्तेमाल के बीच भारतीय चावल की निर्यात कीमतें भी करीब एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। सीमित सप्लाई, नई फसल को लेकर चिंता और अफ्रीकी देशों की मांग से कीमतों को समर्थन मिला है। वैश्विक स्तर पर मौसम का असर भी चावल की सप्लाई पर पड़ रहा है।
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने से Ethanol बनाया जा रहा है, लेकिन अब चीनी की कमी के कारण महंगे दाम पर आयात की नौबत आ सकती है।
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