खबर का असर: भगवानपुर शिवपुर घोटाले में बीडीओ ने सचिव को थमाया कारण बताओ नोटिस, 2 दिन में मांगा जवाब

Balrampur News: ग्राम पंचायत भगवानपुर शिवपुर में नाली, सीसी रोड और ह्यूम पाइप के नाम पर बिना काम कराए लाखों रुपये के फर्जी भुगतान के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। ‘संदेश वाहक’ में खबर छपने और मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) पचपेड़वा ने ग्राम विकास अधिकारी/सचिव संजय कुमार मिश्रा को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर 2 दिन के भीतर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण तलब किया है।

जारी किए गए नोटिस के अनुसार, मामले की जांच हेतु गठित 3 सदस्यीय टीम (जिसमें अवर अभियंता लघु सिंचाई, सहकारिता एडीओ और ग्राम विकास एडीओ शामिल हैं) जब 27 अगस्त 2026 को गांव में स्थलीय निरीक्षण के लिए पहुंची, तो सचिव द्वारा जांच पत्रावली व अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। मौखिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि कार्यों का प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार ही नहीं हुआ था, जबकि भुगतान पहले ही कर दिया गया था।

हैरानी की बात यह है कि 31 अगस्त 2026 को जब समिति ने दूरभाष पर अभिलेख मांगे, तो सचिव ने मनमाने ढंग से यह कहते हुए पत्रावली देने से मना कर दिया कि “जो लिखना हो लिख दो।” वहीं कंसल्टिंग इंजीनियर के बयानों और ऑनलाइन कैश बुक से भी बिना प्राक्कलन मनमाने तरीके से सरकारी धन के आहरण की पुष्टि हुई है, जो पंचायती राज एक्ट और वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

 भगवानपुर शिवपुर घोटाले में बीडीओ ने सचिव को थमाया कारण बताओ नोटिस

बीडीओ ने नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया है कि सचिव 02 दिवस के भीतर स्पष्टीकरण दें तथा 3 दिन में जांच समिति को समस्त पत्रावलियां उपलब्ध कराएं। समय सीमा के भीतर अभिलेख न देने और जांच में सहयोग न करने पर सरकारी धन के दुरुपयोग, अपव्यय व तथ्य छुपाने के आरोप में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी।

वहीं, ग्राम विकास अधिकारी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि हमारे यहां किसी प्रकार का नियम विरुद्ध भुगतान नहीं हुआ है। हमने ह्यूम पाइप की खरीद की है, जो गौशाला के पास रखी हुई है। नाली के रिपेरिंग का कार्य किया गया है। वहीं, सड़क व अन्य का पेमेंट कैंसिल हो चुका है।

अब देखना होगा कि जांच समिति को भगवानपुर शिवपुर के ग्राम विकास अधिकारी संजय कुमार मिश्रा क्या जवाब देते हैं और उनके जवाब के अनुसार क्या कार्रवाई की जाती है?

रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी

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