अभिनंदन वर्धमान ने IAF से ली VRS, अब FLY91 एयरलाइन में उड़ाएंगे कमर्शियल प्लेन
Sandesh Wahak Digital Desk: वर्ष 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद हवाई युद्ध में पाकिस्तान के अत्याधुनिक एफ-16 (F-16) लड़ाकू विमान को मार गिराने वाले भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र विजेता अभिनंदन वर्धमान ने अब एक नया अध्याय शुरू किया है। रक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने भारतीय वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। 31 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से वायुसेना को अलविदा कहने के बाद, वह देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में कदम रख चुके हैं और भारत की रीजनल एयरलाइन FLY91 से जुड़ गए हैं।
FLY91 में बतौर कमर्शियल पायलट नई शुरुआत
सेना के प्रतिष्ठित ग्रुप कैप्टन पद से सेवानिवृत्त होने के बाद अभिनंदन अब यात्री विमान उड़ाते नजर आएंगे। वह भारत की उभरती हुई क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 में बतौर पायलट अपनी सेवाएं देंगे। मार्च 2024 में अपना परिचालन शुरू करने वाली FLY91 के पास वर्धमान में छह ATR 72-600 विमानों का बेड़ा है, जिसका मुख्य संचालन गोवा और हैदराबाद बेस से किया जाता है। हालांकि, अभिनंदन के जुड़ने को लेकर एयरलाइन प्रबंधन ने इसे एक आंतरिक और व्यक्तिगत मामला बताते हुए किसी भी आधिकारिक टिप्पणी से सम्मानपूर्वक इनकार कर दिया है।
2019 की ऐतिहासिक डॉगफाइट और अद्वितीय शौर्य
अभिनंदन वर्धमान का नाम 2019 की ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई से गहराई से जुड़ा है। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए दर्दनाक आतंकी हमले (जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे) के जवाब में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी ठिकानों पर पिनपॉइंट एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले ही दिन, 27 फरवरी 2019 को जब पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की, तब श्रीनगर एयरबेस पर तैनात विंग कमांडर अभिनंदन अपने विंटेज ‘MiG-21 बाइसन’ के साथ तुरंत एक्शन में आ गए। तकनीकी और संख्यात्मक रूप से दुश्मन के आगे होने के बावजूद, उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया।
इजेक्शन, 60 घंटे की हिरासत और सुरक्षित वापसी
इस भीषण हवाई लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी विमान द्वारा दागी गई बीवीआर (BVR) मिसाइल लगने से अभिनंदन का विमान क्षतिग्रस्त हो गया। पैराशूट से इजेक्ट होने के बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के क्षेत्र में उतरे, जहां उन्हें पाकिस्तानी सेना ने बंदी बना लिया। हालांकि, भारत के प्रचंड कूटनीतिक और सामरिक दबाव के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा और महज 60 घंटे के भीतर 1 मार्च 2019 को उन्हें वाघा-अटारी बॉर्डर से सकुशल भारत वापस लौटाना पड़ा।
देश के तीसरे सर्वोच्च युद्धकालीन पदक वीर चक्र से सम्मान
अद्वितीय साहस, रणनीतिक कौशल और कठिन परिस्थितियों में अटूट निष्ठा प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पदक वीर चक्र से अलंकृत किया। आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र में स्पष्ट लिखा गया था कि उनके आक्रामक रुख और त्वरित फैसले ने दुश्मन के पूरे हवाई फॉर्मेशन में खलबली मचा दी थी।
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