अमेरिकी संसद में कड़े प्रतिबंधों का बिल तैयार, भारत से आयात होने वाले सामान पर लग सकता है 100% टैरिफ
Sandesh Wahak Digital Desk: अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के लिए एक बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध विधेयक पर मतदान होने जा रहा है। इस नए प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार और शक्ति मिल जाएगी कि वे उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकें, जो रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात जारी रखे हुए हैं। अमेरिका के इस सख्त कदम की जद में आने वाले प्रमुख राष्ट्रों की सूची में भारत का नाम भी शामिल है।
सीनेट से पास हुआ लिंडसे ओ ग्राहम एक्ट 2026
कानूनी प्रक्रिया और इस विधेयक से जुड़े मुख्य पहलुओं की बात करें तो इस मसौदे का नाम ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ रखा गया है। अमरीकी संसद का उच्च सदन (सीनेट) इस कानून को पहले ही प्रचंड बहुमत से अपनी मंजूरी दे चुका है। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भारतीय समयानुसार गुरुवार को होने वाली वोटिंग में निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) से भी इसके आसानी से पारित होने की पूरी संभावना है।
भारत समेत चार देश सीधे तौर पर निशाने पर
इस विधेयक में पेश किए गए संशोधनों के तहत भारत के अलावा तीन अन्य प्रमुख देशों को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है। यदि ये देश रूस के साथ अपनी ऊर्जा जरूरतों (तेल और गैस व्यापार) को जारी रखते हैं, तो उनके अमरीका जाने वाले निर्यात पर अतिरिक्त 100% का भारी-भरकम टैरिफ थोपा जा सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह प्रावधान कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती बन सकता है।
वैश्विक व्यापार और कूटनीति पर पड़ेगा गहरा असर
यदि यह विधेयक बिना किसी बड़े बदलाव के अंतिम रूप से कानून बन जाता है, तो मॉस्को से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहे देशों और वाशिंगटन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी खटास आ सकती है। विशेष रूप से भारत और अमरीका के बीच जारी व्यापारिक व रणनीतिक सहयोग पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
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