UP में क्यों घुट रहा दम? बढ़ते प्रदूषण और सांस की बीमारियों पर 75 जिलों में होगा बड़ा अध्ययन

UP Clean Air Project: उत्तर प्रदेश में बढ़ता वायु प्रदूषण अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों के मुताबिक हवा में बढ़ रहे पीएम 2.5, कार्बन और अन्य हानिकारक तत्वों के कारण दमा और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या हर साल 10 से 12 फीसदी तक बढ़ रही है। युवाओं में भी फेफड़ों की बीमारियां तेजी से सामने आ रही हैं।

इसी समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (UP Clean Air Project) शुरू किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में वायु प्रदूषण और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। इस परियोजना का खर्च विश्व बैंक वहन करेगा।

पांच साल तक जुटाए जाएंगे नमूने

प्रोजेक्ट के तहत 15 संस्थानों को अलग-अलग जिलों में शोध की जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञ पहले प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करेंगे और वहां उपकरण लगाकर नियमित नमूने एकत्र करेंगे।

प्रोजेक्ट (UP Clean Air Project) के नोडल अधिकारी प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा के अनुसार, हर साल कम से कम 104 नमूनों की जांच होगी। पांच वर्षों में 525 से अधिक नमूनों का विश्लेषण कर प्रदूषण की वजह, उसके दुष्प्रभाव और बचाव संबंधी रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर भविष्य की गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

चार शहरों आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर और झांसी में मिनी सुपर साइट भी स्थापित की जाएंगी। लैब स्थापना के लिए 27.9 लाख रुपये और प्रत्येक मिनी सुपर साइट के लिए 5.20 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी।

युवाओं में बढ़ रही फेफड़ों की बीमारी

एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक प्रदूषण के कारण हवा में कार्बन, आर्सेनिक, लेड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे खतरनाक तत्व बढ़ रहे हैं। इससे दमा, सांस की बीमारी, टीबी और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हर महीने ओपीडी में औसतन 7,500 मरीज पहुंच रहे हैं और प्रदूषण के कारण मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

इन संस्थानों को मिली शोध की जिम्मेदारी

  • आगरा – डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
  • फिरोजाबाद – सेंटर फॉर द डेवलपमेंट ऑफ ग्लास इंडस्ट्री
  • अलीगढ़ – अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
  • बरेली – महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी
  • बिजनौर – राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज
  • गोरखपुर – मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
  • झांसी – बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी
  • कानपुर – हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी
  • लखनऊ – उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण विभाग
  • आंबेडकर नगर – राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज
  • मेरठ – चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय
  • प्रयागराज – एमएनएनआईटी
  • वाराणसी – बीएचयू का इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट

आगरा में 486 तक पहुंच चुका है AQI

प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आगरा में बीते वर्षों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 486 तक पहुंच चुका है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य AQI 50 के आसपास होना चाहिए। 100 से ऊपर का स्तर स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय माना जाता है।

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