US-Iran वार्ता के बीच ट्रंप की नई धमकी, बोले- नहीं माने तो ईरान पर होगा और भी बड़ा हमला
US-Iran Talk: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने माहौल फिर गर्मा दिया है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अहम वार्ता चल रही है, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
इसी दौरान ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान अपने समर्थित समूहों की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अगला हमला पहले से भी ज्यादा सख्त हो सकता है।
ट्रंप के इस बयान ने ऐसे समय पर सुर्खियां बटोरी हैं, जब दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत जारी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर रहा है।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित गुटों को तत्काल रोकना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका दोबारा कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान वार्ता (US-Iran Talk) के दौरान ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इससे बातचीत का माहौल प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है।
बातचीत में क्या चाहते हैं दोनों देश?
ईरान की ओर से सबसे बड़ा मुद्दा लेबनान की स्थिति और उस पर जारी इजरायली हमलों को बताया जा रहा है। तेहरान का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए युद्धविराम और प्रतिबंधों में राहत जरूरी है। साथ ही ईरान अपने विदेशी फंड्स तक पहुंच बहाल करने की मांग भी कर रहा है।
वहीं अमेरिका की प्राथमिकता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को लेकर है। वाशिंगटन चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंच दी जाए, ताकि गतिविधियों की स्वतंत्र जांच हो सके।
इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम माने जाने वाले इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता पर टिकी हैं। हालांकि ट्रंप के ताजा बयान ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि बातचीत के साथ-साथ दबाव की राजनीति भी जारी रहेगी।
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