छात्रों से संवाद कर रहे आप सांसद संजय सिंह की अधिकारियों से तीखी नोकझोंक

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के दौरे के दौरान सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया। सर्किट हाउस के भीतर चल रहे एक छात्र संवाद कार्यक्रम के बीच अचानक भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने जब हस्तक्षेप किया, तो सांसद संजय सिंह का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस दौरान सांसद और आला अधिकारियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस और नोकझोंक होती रही, जिसने अब सूबे की सियासत को गरमा दिया है।

जानकारी के अनुसार, सांसद संजय सिंह सर्किट हाउस के सभागार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ देश-प्रदेश में हो रहे पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे। इसी बीच एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा और डीसीपी सिटी मनीष कुमार शांडिल्य पुलिस अमले के साथ वहां धमक पड़े। अधिकारियों ने जब सांसद से अकेले में चलकर बात करने का आग्रह किया, तो संजय सिंह ने उस पर सख्त आपत्ति जताई।

प्रशासन की इस कार्रवाई पर तीखा पलटवार करते हुए संजय सिंह ने कहा, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस परीक्षा प्रणाली पर आज देश का युवा चर्चा कर रहा है, उसी परीक्षा को पास करके ये अधिकारी इस ऊंचे प्रशासनिक पद तक पहुंचे हैं। और आज वही अफसर युवाओं की आवाज और इस विषय पर हो रही चर्चा को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों के सामने ही सवाल दाग दिया कि क्या पेपर लीक और नौजवानों के रोजगार पर बात करना कोई अपराध है?

सांसद ने अपनी जगह से उठने से साफ इनकार कर दिया और प्रशासन को आईना दिखाते हुए कहा कि वे सर्किट हाउस के बंद कमरे के भीतर एक पूरी तरह से वैध और शांतिपूर्ण कार्यक्रम कर रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र को इस तरह किसी जनप्रतिनिधि के कार्यक्रम की जबरन निगरानी करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

सर्किट हाउस किसी अधिकारी की निजी जागीर नहीं

अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए आप सांसद ने कहा कि सर्किट हाउस किसी अधिकारी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह जनता के टैक्स के पैसे से बना एक सार्वजनिक विश्राम गृह है। उन्होंने कहा कि यहाँ कोई देशविरोधी गतिविधि नहीं हो रही थी, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए मंथन चल रहा था। संजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि उनके संसदीय अधिकारों और विशेषाधिकारों का हनन करने की कोशिश की गई, तो वह इस पूरे मामले को संसद की प्रिविलेज कमेटी (विशेषाधिकार समिति) के सामने उठाएंगे।

सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लिखा- यूपी में तानाशाही चरम पर

इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर साझा करते हुए संजय सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, यूपी में तानाशाही इस समय चरम पर है। अब बंद कमरे में भी लाखों छात्रों के भविष्य और हक पर बात करने की आजादी नहीं रह गई है। पेपर लीक पर चर्चा होते ही प्रशासन उसे रोकने के लिए पहुंच जाता है। मोदी-योगी की यह डबल इंजन सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। घटना के वक्त सर्किट हाउस परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, काफी गहमागहमी के बाद मामला शांत तो हो गया, लेकिन इस सीधे टकराव ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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