Lucknow News: ‘जेपी को बेचने वाले BJP को भी बेच देंगे’, JPNIC लीज पर अखिलेश यादव का कड़ा प्रहार
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को 30 साल की लीज पर दिए जाने को लेकर योगी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंप रही है।
सपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि करीब 20 एकड़ में बने जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर देना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उनके मुताबिक, जनता के पैसे से बनी इस संपत्ति का इस्तेमाल सार्वजनिक हित में होना चाहिए था।
‘जितने में दिया, उससे एक रुपया ज्यादा देंगे’
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने जिस कीमत पर जेपीएनआईसी को लीज पर दिया है, समाजवादी पार्टी उससे एक रुपया अधिक देने को तैयार है, लेकिन इस संपत्ति को सार्वजनिक उपयोग के लिए वापस किया जाए।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने और निजी हाथों में देने की नीति पर काम कर रही है।
अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, “दिल्ली का बड़ा इंजन बड़ी चीजें बेच रहा है और उत्तर प्रदेश का छोटा इंजन छोटी चीजें बेच रहा है।”
‘जेपी को बेचने वाले BJP को भी बेच देंगे’
सपा प्रमुख ने भाजपा को ‘दुकानदारों की पार्टी’ बताते हुए कहा कि जिस पार्टी ने जयप्रकाश नारायण के नाम से जुड़ी संपत्ति को निजी हाथों में दिया है, उसे मौका मिला तो वह अपनी पार्टी को भी बेच सकती है।
उन्होंने जेपीएनआईसी के निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि इसका शिलान्यास मुलायम सिंह यादव के समय हुआ था और बाद में सपा सरकार में निर्माण कार्य को गति दी गई।
अखिलेश के मुताबिक, केंद्र का उद्देश्य केवल भवन बनाना नहीं, बल्कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों और संघर्षों से नई पीढ़ी को जोड़ना था।
2027 में जांच कराने का दावा
अखिलेश यादव ने सरकार पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप भी लगाए।
उन्होंने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर मौजूदा सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार और विवादित फैसलों की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

जेपीएनआईसी को 30 साल की लीज पर दिए जाने का मुद्दा अब यूपी की सियासत में तूल पकड़ता दिख रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले सपा इसे सार्वजनिक संपत्ति और निजीकरण के मुद्दे के तौर पर उठा रही है।
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