सेना को मिले 123 नए जांबाज मेडिकल अफसर, ओटीसी में शानदार परेड के साथ संपन्न हुआ नौ हफ्तों का कड़ा प्रशिक्षण

Lucknow News: राजधानी लखनऊ के आर्मी मेडिकल कोर (AMC) सेंटर एवं कॉलेज में गुरुवार को मेडिकल ऑफिसर्स बेसिक कोर्स (MOBC)-256 का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर आयोजित कोर्स समापन परेड ने सैन्य अनुशासन और गौरव की अनूठी मिसाल पेश की। नौ हफ्तों के इस चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण के बाद युवा डॉक्टरों और डेंटल ऑफिसर्स ने अब सेना के ‘मेडिकल वारियर्स’ के रूप में अपनी नई पहचान बनाई है।

इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य युवा मेडिकल और डेंटल ऑफिसर्स को आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के लिए तैयार करना था। ऑफिसर्स को कॉम्बैट मेडिकल सपोर्ट की गहन ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों को तुरंत जीवनदान दे सकें। उन्हें एडवांस्ड ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (ATLS) और युद्धक्षेत्र की उन नई तकनीकों से रूबरू कराया गया, जो भविष्य के युद्धों की दिशा बदल रही हैं। इस बैच में थल सेना, वायु सेना और नौ सेना के कुल 123 अधिकारी शामिल थे, जिनमें 38 महिला अधिकारियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से नारी शक्ति का लोहा मनवाया।

सेना को मिले 123 नए जांबाज मेडिकल अफसर, ओटीसी में शानदार परेड के साथ संपन्न हुआ नौ हफ्तों का कड़ा प्रशिक्षण

सम्मान और पुरस्कार

परेड की समीक्षा एएमसी सेंटर एवं कॉलेज के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल शिवेंद्र सिंह (AVSM) ने की। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

कैप्टन साहिल तंवर (159 इन्फैंट्री बटालियन, TA): इन्हें कोर्स का सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण अधिकारी (Best All-round Officer) चुना गया और कमांडेंट रोलिंग ट्रॉफी से नवाजा गया।

फील्ड स्पर्धाओं में सर्वश्रेष्ठ: कैप्टन साहिल तंवर को ही फील्ड इवेंट्स में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह अशोक चक्र मेमोरियल ट्रॉफी भी प्रदान की गई।

सेना को मिले 123 नए जांबाज मेडिकल अफसर, ओटीसी में शानदार परेड के साथ संपन्न हुआ नौ हफ्तों का कड़ा प्रशिक्षण

जवानों की सेवा ही सर्वोच्च धर्म

युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल शिवेंद्र सिंह ने उनके जोश और परेड के शानदार संचालन की तारीफ की। उन्होंने ऑफिसर्स को प्रेरित करते हुए कहा कि सेना में डॉक्टर होना सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि चाहे युद्ध का मैदान हो या शांति का समय, सैनिकों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा देना ही उनका परम लक्ष्य होना चाहिए।

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भावुक हुए माता-पिता

इस खास पल के गवाह बनने के लिए 200 से अधिक अभिभावक और रिश्तेदारों के साथ भारी संख्या में सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। अपने बच्चों को वर्दी में देश सेवा का संकल्प लेते देख कई माता-पिता की आँखें गर्व से नम हो गईं।

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