आपराधिक केस में जमानत पर रिहा आरोपी को विदेश जाने से नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद HC

Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो अहम मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। पहले मामले में कोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले में जमानत पर रिहा व्यक्ति को बिना ठोस कारण विदेश जाने से नहीं रोका जा सकता। वहीं दूसरे मामले में कोर्ट ने पांच वर्षीय बच्ची की अंतरिम अभिरक्षा उसकी मां से लेकर पिता को सौंपने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने महराजगंज निवासी वजीर आलम की याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) द्वारा विदेश यात्रा के लिए NOC देने से इनकार करने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि याची 10 दिनों के भीतर नया आवेदन देता है तो उस पर 15 दिनों के अंदर कानून के अनुसार फैसला लिया जाए।

विदेश यात्रा मौलिक अधिकार, बिना वजह नहीं रोका जा सकता

मामला वर्ष 2021 में दर्ज एक आपराधिक केस से जुड़ा है। याची ने अदालत को बताया कि उस पर दो नाबालिग बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी है तथा रोजगार के लिए विदेश जाना चाहता है। उसने यह भरोसा भी दिया कि जरूरत पड़ने पर वह अदालत में पेश होगा और मुकदमे की पैरवी परिवार के सदस्य करेंगे।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मेनका गांधी बनाम भारत संघ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विदेश यात्रा करना भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने माना कि विशेष अदालत ने एनओसी खारिज करते समय कोई ठोस कारण दर्ज नहीं किया। साथ ही यह भी देखा कि याची पहले किसी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है और उसके खिलाफ दर्ज अपराध जघन्य श्रेणी का नहीं है।

पांच साल की बच्ची की अंतरिम कस्टडी पिता को

एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच वर्षीय बच्ची की अंतरिम अभिरक्षा पिता को सौंपने का आदेश दिया। पिता ने आरोप लगाया था कि मां उसे बेटी से मिलने नहीं दे रही है और पहले दिए गए वीडियो कॉल के अधिकार का भी पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बच्ची से बातचीत की। अदालत ने कहा कि बच्ची की उम्र के मुकाबले उसकी बातें असामान्य रूप से परिपक्व लगीं, जिससे प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हुआ कि उसे कुछ बातें सिखाई गई हैं। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता के विवाद में बच्चे को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए।

फिलहाल अदालत ने अगली सुनवाई तक बच्ची की अंतरिम अभिरक्षा पिता को देने का आदेश दिया है। साथ ही मां को पिता के घर जाकर बच्ची से मिलने और वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करने की अनुमति दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

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