रामनवमी पर रामलला का हुआ सूर्य तिलक, दिव्य रोशनी से जगमगा उठा प्रभु का ललाट
Ayodhya News: चैत्र रामनवमी के अवसर पर आज रामनगरी अयोध्या एक ऐसे अलौकिक और ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जिसे देखकर हर रामभक्त की आंखें सजल हो गईं। शुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे, जब भगवान राम का जन्म हुआ, तब सूर्य देव ने स्वयं अपनी किरणों से प्रभु रामलला का राजतिलक किया।
जैसे ही घड़ी की सुइयों ने 12 बजाए, मंदिर के ऊपरी हिस्से से पाइप और दर्पणों (शीशों) के जरिए सूर्य की किरणें परावर्तित होकर सीधे रामलला के मस्तक पर पहुंचीं। करीब 75 मिलीमीटर का यह गोलाकार दिव्य तिलक लगभग 4 मिनट तक प्रभु के ललाट पर चमकता रहा। मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालु इस नजारे को देख खुशी से झूम उठे और पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा।

पीएम मोदी ने भी देखा लाइव प्रसारण
इस दिव्य घटना का देश-दुनिया में सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में अपने आवास पर इस ऐतिहासिक पल का लाइव प्रसारण देखा। जैसे ही सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर पड़ीं, पीएम मोदी भी भावुक हो उठे और उन्होंने तालियां बजाकर इस पल का स्वागत किया।
विज्ञान और आस्था का बेजोड़ संगम
सूर्य तिलक की यह प्रक्रिया आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आस्था का अद्भुत मेल है।
कैसे हुआ तिलक: सूर्य की किरणें मंदिर के ऊपरी हिस्से से प्रवेश करती हैं और दर्पणों के माध्यम से रिफ्लेक्ट (परावर्तित) होकर सीधे मूर्ति के ललाट पर पड़ती हैं।
ध्वजारोहण: इससे पहले अष्टमी के दिन राम जन्मभूमि परिसर स्थित सूर्य मंदिर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ ‘ॐ’ अंकित केसरिया ध्वज फहराया गया था।
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