बहराइच के दो बाल वैज्ञानिकों ने किया प्लास्टिक पर शोध, बच्चों में दिखा बेहतर असर

Bahraich News: आरव रघुवंशी और आराध्या ने ‘रिथिंकिंग प्लास्टिक: द पाथ टू ए क्लीनर प्लैनेट’ विषय पर शोध किया। दस घरों के कचरे का अध्ययन कर बच्चों और वयस्कों को प्लास्टिक के नुकसान के प्रति जागरूक किया।

बहराइच में दो बाल वैज्ञानिक प्लास्टिक से होने वाले नुकसान और उसके प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव को समझने के लिए शोध कर रहे हैं। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस से जुड़े जूनियर वैज्ञानिक आरव रघुवंशी और आराध्या ने ‘Rethinking Plastic: The Path to a Cleaner Planet’ विषय चुना है। उनका उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से यह जानना है कि प्लास्टिक के नुकसान के बारे में जानकारी देने से बच्चों और बड़ों की आदतों में कितना बदलाव आता है।

शोध शुरू करने से पहले दोनों बाल वैज्ञानिकों ने कैसरगंज नगर पंचायत के अध्यक्ष यूसुफ अली के साथ बैठक कर अपनी योजना साझा की। इसके बाद नगर पंचायत से जरूरी आंकड़े जुटाए गए। दोनों ने अपने मार्गदर्शक शिक्षकों इंद्रमोहन यादव और रसल रघुवंशी के साथ क्षेत्र में जाकर शोध किया।

दस घरों के कचरे का विश्लेषण, बच्चों और बड़ों को किया जागरूक

शोध के लिए जमालुद्दीनपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 4 में सभासद अखिलेश वर्मा के क्षेत्र को चुना गया। यहां दस घरों से मिले कचरे का विश्लेषण किया गया। इसके बाद पांच घरों के बच्चों को प्लास्टिक के नुकसान के बारे में बताया गया, जबकि अन्य पांच घरों के वयस्कों को इस विषय पर जागरूक किया गया।

शोध के दौरान जागरूकता के बाद लोगों के व्यवहार में आए बदलाव को समझने की कोशिश की गई। दोनों बाल वैज्ञानिकों के अनुसार, अंतिम परिणाम में बच्चों पर जागरूकता का असर बेहतर दिखाई दिया। इस अध्ययन के जरिए यह समझने का प्रयास किया गया कि सही जानकारी देकर बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना कैसे बढ़ाई जा सकती है।

स्कूलों में शोध प्रस्तुत कर रहे बाल वैज्ञानिक 

अपने शोध के निष्कर्ष साझा करने और प्लास्टिक के नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आरव और आराध्या ने मार्गदर्शक शिक्षकों के साथ स्कूलों का दौरा भी किया।

सबसे पहले वे उच्च प्राथमिक विद्यालय चिल्वा अवस्थीपुर पहुंचे। वहां प्रभारी प्रधानाध्यापिका राजश्री मौर्या ने दोनों बच्चों का उत्साह बढ़ाया। बाल वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों के सामने अपने शोध को वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत किया और प्लास्टिक से होने वाले नुकसान की जानकारी दी।

इसके बाद दोनों प्राथमिक विद्यालय हसना पहुंचे। यहां प्रभारी प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार, नीलम और रविन्द्र सिंह सहित विद्यालय के बच्चों के साथ शोध पर विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों की समझ बढ़ाने के लिए प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया गया।

अब इस शोध को आगे स्थानीय सरकारी विद्यालयों और कई निजी संस्थानों में प्रस्तुत करने की योजना है। इसके तहत कैसरगंज के ब्लॉक प्रमुख संदीप सिंह, उपजिलाधिकारी प्रशांत कुमार नायक, विकास खंड अधिकारी सुरेश कुमार गौतम और खंड शिक्षा अधिकारी अर्चना के स्तर पर भी शोध को साझा करने की योजना बताई गई है।

इसके अलावा कंचन कॉन्वेंट स्कूल के प्रबंधक मनीष श्रीवास्तव और हुकुम सिंह इंटर कॉलेज, सर सैय्यद इंटरनेशनल स्कूल, सरदार पटेल इंटर कॉलेज, मदनी इंटर कॉलेज, अपेक्स इंटरनेशनल स्कूल, पायनियर स्कूल तथा कोणार्क पब्लिक सहित अन्य निजी विद्यालयों में भी शोध प्रदर्शित करने की तैयारी है।

दोनों बाल वैज्ञानिक 5 नवंबर को एम्स इंटरनेशनल स्कूल, हुजूरपुर रोड, बहराइच में अपना शोध प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. नंद किशोर शुक्ल कर रहे हैं।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के प्रति समाज को जागरूक करना है। शोध के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए जागरूकता के साथ लोगों की आदतों में बदलाव लाना भी जरूरी है।

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