बलरामपुर: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा जिला महिला अस्पताल का कायाकल्प, ₹1.52 करोड़ के बजट पर फिरा पानी
जिला महिला चिकित्सालय को शासन अब तक नहीं दे सका जिला चिकित्सालय का दर्जा, फिर भी खरीद लिए गए लाखों के आधुनिक उपकरण
बलरामपुर। आधी आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का एक बड़ा मामला जिला महिला अस्पताल में सामने आया है। अस्पताल को आधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए शासन द्वारा जारी किया गया ₹1,52,42,000 का भारी-भरकम बजट, अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। विडंबना यह है कि जहां एक ओर वित्त वर्ष की समाप्ति और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की सेवानिवृत्ति नजदीक है, वहीं दूसरी ओर, करोड़ों के उपकरण बिना किसी सत्यापन के बरामदों और खुले आसमान के नीचे धूल फांक रहे हैं।
बजट ‘ठिकाने’ लगाने की हड़बड़ी
अस्पताल के उच्चीकरण के लिए बजट जनवरी में ही मिल गया था, लेकिन एक माह तक निविदा प्रक्रिया को दबाए रखा गया। इसके बाद 12 फरवरी को ₹1.06 करोड़ की निविदा आनन-फानन में निकाली गई। 27 फ़रवरी को निविदा खोली गई। वित्त वर्ष खत्म होने से ठीक पहले 23 मार्च को कार्यदायी संस्था ने उपकरणों की आपूर्ति तो कर दी, लेकिन अस्पताल प्रशासन के पास इन्हें रखने तक की जगह नहीं है। वर्तमान में अस्पताल के लेबर रूम के बाहर और कार्यालय के बरामदों में 18 ड्रेसिंग टेबल, 15 स्ट्रेचर, 10 इमरजेंसी ड्रग कैबिनेट ट्रॉली, कंप्यूटर और अन्य कीमती सामान बेतरतीब ढंग से पड़े हुए हैं।
आधुनिकता के नाम पर लापरवाही का ‘खेल’
योजना के तहत अस्पताल को एआई आधारित अल्ट्रासाउंड मशीन, आधुनिकतम एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन और आधुनिक ऑपरेशन थिएटर से लैस किया जाना था। नियमानुसार, नए उपकरण आने से पहले पुराने सामान को ‘कंडम’ घोषित कर उनकी नीलामी की जानी चाहिए थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर पुराने कबाड़ को एसएनसीयू के ऊपर फिंकवा दिया है।
उपकरणों की गुणवत्ता और उनके सत्यापन को लेकर भी गंभीर संशय बना हुआ है, क्योंकि आपूर्ति के बाद अब तक इनका उचित प्रमाणीकरण नहीं कराया गया है। बताया जाता है कि बलरामपुर में स्वास्थ्य विभाग का अपना कोई जूनियर इंजीनियर नहीं है, इसलिए गोंडा के जूनियर इंजीनियर पर ही बलरामपुर का चार्ज है और वह कभी कभार ही जिले में आते हैं। ऐसे में 31 मार्च तक इस आधुनिकतम उपकरणों व साजोसामान का प्रमाणीकरण हो पाना, टेढ़ी खीर नजर आ रही है।
जिम्मेदारों की रहस्यमयी चुप्पी
इस पूरे गड़बड़झाले पर जब अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुमन दत्त गौतम का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने बताया कि शासन द्वारा मिले उच्चीकरण के बजट से अस्पताल का उच्चीकृत करवाया जा रहा है। वैसे तो यह अस्पताल 76 बेड के रूप में संचालित किया जाता है और साथ ही 24 बेड बच्चों के लिए है। लेकिन अब इसे बढ़ाया जाना है इसलिए सुविधाओं में बढ़ोतरी की जा रही है। फिलहाल उन्होंने कर्मचारी और डॉक्टरों की कमी होने की बात कही। उन्होंने कहा कि शासन को पत्र लिखा जा रहा है कि अस्पताल के उच्चीकरण के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं, जिससे बलरामपुर की आधी आबादी को लाभ मिल सके। वहीं उन्होंने बाकी बचे बजट के सवाल पर कहा कि बाकी का जो भी बजट बचा है, वह मार्च महीने के अंत तक शासन को दोबारा भेज दिया जाएगा।
सवाल यह खर्च उठना है कि जब अस्पताल के पास ना तो भवन है, ना ही पर्याप्त कर्मचारी तो किस तरह से करोड़ों के इस बजट का उपयोग करके अस्पताल को उच्चीकृत किया जाएगा। ऐसे में यह कागजी खानापूर्ति कर बजट को ठिकाने लगाने की तैयारी भर प्रतीत होती है। फिलहाल, शासन की मंशा के विपरीत जिला महिला अस्पताल में आधुनिकता के नाम पर केवल अराजकता और संसाधनों की बर्बादी दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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