यूपी में बिना नक्शा पास बने अवैध निर्माणों पर चलेगा बुलडोजर, अफसरों और इंजीनियरों की सीधे तय होगी जिम्मेदारी

Lucknow News: उत्तर प्रदेश के शहरों में बिना नक्शा पास कराए धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शासन स्तर पर अब ऐसे अवैध निर्माण करने वालों के साथ-साथ उन्हें शह देने वाले अधिकारियों और अभियंताओं (इंजीनियरों) पर भी सीधी गाज गिरेगी।

नए नियमों के तहत अवैध इमारतों को न सिर्फ सील किया जाएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त (डिमोलिश) भी कर दिया जाएगा। विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद जल्द ही पूरे राज्य में अभियान चलाकर ऐसी अवैध संपत्तियों को चिह्नित करेंगे। लखनऊ के अलीगंज में हाल ही में एक अवैध बिल्डिंग में हुई आगजनी की घटना के बाद शासन ने यह सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।

प्रमुख सचिव आवास द्वारा हर महीने की जाने वाली समीक्षा बैठकों और सख्त निर्देशों के बावजूद शहरों में अवैध निर्माण नहीं रुक रहे हैं। इसी को देखते हुए आवास विभाग जल्द ही एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करने जा रहा है। इसके तहत अवैध निर्माण के मामलों में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कार्रवाई की संस्तुतियों पर तुरंत फैसला लिया जाएगा। हालांकि, सील किए गए भवनों के मालिकों को सुनवाई का मौका देते हुए खुद से निर्माण हटाने की मोहलत भी दी जाएगी, लेकिन इसके बाद भी आदेश न मानने पर कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यूपी के शहरों में 2.6 लाख से अधिक अवैध निर्माण चिह्नित

शहरवार आंकड़े और जवाबदेही: शासन द्वारा मार्च 2026 तक की गई समीक्षा में पूरे उत्तर प्रदेश के भीतर कुल 2,60,206 अवैध निर्माणों की पहचान की गई है। इनमें से कई मामलों पर फिलहाल कार्रवाई चल रही है। राज्य सरकार ने अब सभी विकास प्राधिकरणों से अवैध निर्माण और उनके निस्तारण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में चिह्नित किए गए अवैध निर्माणों का विवरण इस प्रकार है:

शहर चिह्नित अवैध निर्माणों की संख्या
प्रयागराज 39,083
वाराणसी 29,592
लखनऊ 23,064
मेरठ 15,099
कानपुर 13,344
मुरादाबाद 12,875
गाजियाबाद 12,063
आगरा 11,966
अलीगढ़ 7,752

अब से सभी विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद को हर महीने शासन के पास प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजनी होगी। इस मासिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि इस अवधि के दौरान कितने पुराने अवैध निर्माणों को गिराया गया, कितनी नई इमारतों को सील किया गया और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कितने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया।

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