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इसलिए जिंदा हूं कि बोल रहा हूं, दुनिया किसी गूंगे की कहानी नहीं सुनती

मैंने जब एक आदमी को छेनी हथौड़ी से पहाड़ तोड़ते देखा तो पूछा कि यह कैसे कर पाओगे? उसने कहा करते-करते। असंभव को संभव कर…

अगर दुनिया भारी लगे… तो बच्चों की ओर देखिए- एक उम्मीद भरी नज़र से

"इसे बच्चों के हाथों से उठाओ, ये दुनिया इस क़दर भारी नहीं है...." ये पंक्तियां जिस समय लिखी गईं शायद उस वक़्त एक थके हुए शायर…

Lucknow: ‘अपने हिस्से का युद्ध’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण, स्त्री विमर्श पर नई…

Sandesh Wahak Digital Desk: मशहूर लेखिका और 'आकाशगंगा' सांस्कृतिक संस्था की अध्यक्ष शीला पांडे की नई पुस्तक "अपने हिस्से का युद्ध…