प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक, अब कक्षा 8 तक अनिवार्य होंगी NCERT किताबें

Sandesh Wahak Digital Desk: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से परेशान अभिभावकों के लिए बड़ी राहत देने वाली खबर है। देशभर के निजी स्कूलों द्वारा हर साल बदली जाने वाली महंगी किताबों और भारी स्कूल बैग के बोझ पर अब लगाम लगने वाली है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने नमो फाउंडेशन की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ ‘अकादमिक भेदभाव’ (Academic Discrimination) बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

महंगी किताबों के सिंडिकेट पर प्रहार

आयोग ने पाया है कि कई प्राइवेट स्कूल जानबूझकर निजी पब्लिशर्स की किताबें लगवाते हैं, जिनकी कीमत NCERT की किताबों से कई गुना अधिक होती है। आयोग ने निर्देश दिया है कि कक्षा 8 तक केवल NCERT/SCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) की धारा 29 का जिक्र करते हुए कहा गया कि जब सरकारी स्कूलों में सरकारी मानक लागू हैं, तो प्राइवेट स्कूलों में अलग और महंगा सिलेबस पढ़ाना भेदभाव की श्रेणी में आता है।

स्कूल बैग पॉलिसी 2020 हो लागू

सिर्फ किताबें ही नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आयोग ने नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020 को सख्ती से लागू करने को कहा है। स्कूलों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के कंधों पर लदा बस्ता तय मानकों से अधिक भारी न हो। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ज्यादा किताबें और भारी बोझ लादने वाले स्कूलों के खिलाफ प्रशासन कड़ी कानूनी कार्रवाई करे।

राज्यों से पूछे गए 3 कड़े सवाल

NHRC ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से तीन मुख्य बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। क्या जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी स्कूलों को NCERT किताबें अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है? यदि आदेश नहीं दिया गया है, तो इसे तुरंत लागू कर स्कूलों की सूची की जांच (Audit) कब तक की जाएगी? सत्र 2025-26 के लिए निजी और सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों और उनके लिए खरीदी गई किताबों का पूरा विवरण क्या है?

आयोग के इस आदेश के बाद अब प्रशासन को अगले 30 दिनों के भीतर स्कूलों का ऑडिट करना होगा। यदि किसी भी स्कूल में NCERT के अलावा निजी प्रकाशकों की अनावश्यक किताबें मिलीं, तो स्कूल प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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