धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण की तुलना वाले बयान पर मांगी माफी, नेताओं ने जताई थी आपत्ति
Sandesh Wahak Digital Desk: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कथा के दौरान उनके द्वारा भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूपों, विशेषकर भगवान कृष्ण के खड़े होने के अंदाज और त्रिभंगी मुद्रा को लेकर की गई टिप्पणियों पर विभिन्न दलों के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है और उन पर तीखे हमले किए हैं।
बयान का वीडियो वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईशनिंदा को कभी माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के सभी कार्यक्रमों पर रोक लगाने और समाज से उनके पूर्ण बहिष्कार की अपील की है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि भगवान राम और कृष्ण एक ही दिव्य सत्ता के दो अलग-अलग और पूरक रूप हैं, एक ने मर्यादा का पाठ पढ़ाया तो दूसरे ने माधुर्य भाव का उत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि महज सनसनी फैलाने के लिए पवित्र स्वरूपों की गरिमा को कमतर नहीं किया जाना चाहिए।
राजद नेता तेजस्वी यादव और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस बयान को लेकर भाजपा और समर्थित बाबाओं पर निशाना साधा। तेजस्वी यादव ने इसे सनातन एकता को खंडित करने वाला प्रयास बताया, वहीं महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर भाजपा की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कटाक्ष करते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हुई हैं।
धीरेंद्र शास्त्री की सफाई और माफी
चहुंओर बढ़ते विरोध और सियासी घमासान को भांपते हुए, धीरेंद्र शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने हाथ जोड़कर माफी मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयानों के अर्थ को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका उद्देश्य किसी की भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि वे केवल कथा के दौरान भक्ति रस और विनोदपूर्ण शैली में अपनी बात कह रहे थे।
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