‘वंदे मातरम’ पर कांग्रेस के भीतर ही मतभेज? CWC के फैसले पर नेताओं ने कहा- बेतुका मुद्दा

Congress on Vande Mataram: कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के केवल पहले दो पैराग्राफ गाने का फैसला किया है। हालांकि, इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर ही इसे लेकर बेचैनी और असहमति के स्वर सुनाई देने लगे हैं।

कुछ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पार्टी को इस मुद्दे पर ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी और विवाद को बढ़ाने के बजाय इसे संभालने की कोशिश करनी चाहिए थी। वहीं, पार्टी नेतृत्व अपने फैसले के पीछे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लिए गए पुराने निर्णयों का हवाला दे रहा है।

Congress के भीतर ही उठने लगी आवाज

CWC के एक सदस्य ने इसे “बेतुका मुद्दा” बताते हुए कहा कि पार्टी को इस पर बहस में उलझने के बजाय इसे छोड़ देना चाहिए था। एक अन्य नेता ने कहा कि छात्रों की आकांक्षाओं, चंदा चोरी और सरकार के बैकफुट पर होने जैसे ज्यादा अहम मुद्दे मौजूद हैं।

उनका तर्क है कि कांग्रेस को ऐसे मुद्दे को नहीं उठाना चाहिए, जिससे बीजेपी को राजनीतिक फायदा मिल सके।

कांग्रेस ने अपने फैसले के समर्थन में 1937 के CWC प्रस्ताव का हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर समेत स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर वंदे मातरम के पहले दो श्लोकों तक सीमित रखने का समर्थन किया था।

CWC सदस्य कन्हैया कुमार ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति खत्म करने के लिए स्पष्ट रुख जरूरी था। उनके मुताबिक, कांग्रेस को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत की रक्षा करनी है।

सिंघवी ने बताया कानून का पक्ष

अभिषेक मनु सिंघवी

कांग्रेस के कानूनी विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को मौजूदा कानून के आधार पर कानूनी राय दी है। उन्होंने सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि संशोधित कानून में वंदे मातरम (Vande Mataram) के कितने पैराग्राफ गाए जाएं, इसका कोई विशेष उल्लेख नहीं है।

सिंघवी के मुताबिक, कानून मुख्य रूप से आधिकारिक राष्ट्रीय समारोहों और राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालने या उसे रोकने जैसे मामलों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने आंतरिक पार्टी कार्यक्रमों को लेकर फैसला कर रही है।

केरल में नहीं गाया गया Vande Mataram

इस फैसले के बीच केरल का मामला भी चर्चा में है। स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस नेतृत्व वाली केरल सरकार में वंदे मातरम का गायन नहीं कराया गया। जब सिंघवी से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर फैसला ले सकती हैं।

वहीं, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा गायन कराया गया था। इसी के बाद Congress के दो पैराग्राफ वाले फैसले ने पार्टी के भीतर और बाहर बहस को और तेज कर दिया है।

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