लखनऊ से वैश्विक मंच तक, ‘वायरसडीज़ीज़’ जर्नल ने बढ़ाया भारतीय विज्ञान का मान

Sandesh Wahak Digital Desk: स्प्रिंगर नेचर द्वारा प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘वायरसडीज़ीज़’ को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित “स्प्रिंगर नेचर SDG प्रोग्राम बैज” से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान जर्नल की उस वैज्ञानिक भूमिका को रेखांकित करता है, जिसके माध्यम से विषाणु विज्ञान के शोध को समाज, स्वास्थ्य नीति और वैश्विक कल्याण से जोड़ा गया है।

राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्यरत प्रो. शैलेंद्र सक्सेना ने इस उपलब्धि को जर्नल की संपादकीय प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि जर्नल का उद्देश्य हमेशा यह रहा है कि विषाणु विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहे, बल्कि नीति निर्माण, बेहतर डायग्नोस्टिक्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने में भी प्रभावी भूमिका निभाए।

उनके अनुसार यह सम्मान लेखकों, समीक्षकों और संपादकीय मंडल की सामूहिक मेहनत का प्रतिफल है।

स्प्रिंगर नेचर SDG प्रोग्राम की निदेशक डॉ. निकोला जोन्स ने जर्नल के प्रधान संपादक को भेजे आधिकारिक पत्र में पुष्टि की कि वर्ष 2025 के दौरान ‘वायरसडीज़ीज़’ में प्रकाशित 50 प्रतिशत से अधिक शोध लेख सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से एक या अधिक से संबंधित रहे।

उन्होंने कहा कि जर्नल ने वैज्ञानिक अनुसंधान को वैश्विक सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है और यह उपलब्धि सार्वजनिक मान्यता की पात्र है।

जर्नल वेबसाइट पर प्रदर्शित होगा आधिकारिक SDG बैज

इस सम्मान के बाद ‘वायरसडीज़ीज़’ की आधिकारिक वेबसाइट पर स्प्रिंगर नेचर का SDG प्रोग्राम बैज प्रदर्शित किया जा रहा है।

इसके साथ यह संदेश भी प्रकाशित किया गया है कि 2025 में जर्नल में प्रकाशित आधे से अधिक शोध लेख SDGs से जुड़े रहे।

स्प्रिंगर नेचर ने SDG पब्लिशर्स कॉम्पैक्ट के अंतर्गत यह कार्यक्रम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य ऐसे शोध को बढ़ावा देना है जो स्वास्थ्य, स्वच्छ जल, नवाचार, बुनियादी ढांचा और वैश्विक साझेदारी जैसी चुनौतियों के समाधान में योगदान दे।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित रहा शोध

‘वायरसडीज़ीज़’ मानव, पशु, पौधों और पर्यावरणीय विषाणुओं से जुड़े शोध प्रकाशित करता है। वर्ष 2025 में प्रकाशित अधिकांश अध्ययन SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) से संबंधित रहे।

इसके अलावा SDG-6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता), SDG-9 (उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा) तथा SDG-17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारी) पर आधारित शोधों को भी प्रमुखता मिली।

यह सम्मान न केवल भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय शोध वैश्विक स्वास्थ्य और सतत विकास की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

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