UP में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी मिली तो कमिश्नर-DM भी नपेंगे, चुनाव आयोग ने तय कीं जिम्मेदारियां
UP Voter List Errors: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग ने सख्ती बढ़ा दी है। अब गलत प्रविष्टियों और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही मिलने पर सिर्फ जिला निर्वाचन अधिकारियों ही नहीं, बल्कि मंडलायुक्तों की जवाबदेही भी तय होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों (DM) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कंप्यूटर सहायकों की फॉर्म फीडिंग पर रोक
CEO ने तत्काल प्रभाव से कंप्यूटर सहायकों के जरिए मतदाता फॉर्म की ऑनलाइन फीडिंग पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ही बीएलओ एप के माध्यम से भौतिक रूप से जमा फॉर्मों को डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे।
10 अप्रैल को SIR की अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद से कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच भी कराई जाएगी। इन फॉर्मों का इस्तेमाल क्रमशः मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और विवरण में संशोधन के लिए होता है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
CEO ने स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियां नहीं होनी चाहिए। मंडलायुक्तों को रोल प्रेक्षक के तौर पर अपने मंडलों में निगरानी करनी होगी, जबकि गड़बड़ी मिलने पर संबंधित जिले के डीएम की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
पीलीभीत जैसे मामले दोहराए तो होगी कार्रवाई
नवदीप रिणवा ने अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 का अध्ययन करने को कहा। इस धारा के तहत कर्तव्य उल्लंघन पर दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। पीलीभीत जैसे प्रकरण दोबारा सामने आने पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) और कंप्यूटर सहायक के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी की जवाबदेही भी तय होगी। मंडलायुक्तों के खिलाफ भी पर्यवेक्षण में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई हो सकती है।
बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया पर सामने आईं डुप्लीकेट मतदाताओं की शिकायतों पर समय से रिपोर्ट नहीं देने पर भी सीईओ ने नाराजगी जताई और जल्द आख्या भेजने को कहा।
इसके अलावा, 24 अक्टूबर के विशेष अभियान दिवस पर बूथों से अनुपस्थित रहने वाले BLO के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई। ECINET एप और पोर्टल पर ‘बुक अ कॉल विद बीएलओ’ के तहत मिलने वाली कॉल रिक्वेस्ट का जवाब 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड साझा न करने तथा ईसीआईनेट में निजी मोबाइल नंबर जोड़ने की हिदायत भी दी गई।
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