करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, दो इनामी जालसाज गिरफ्तार
Lucknow News: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने फर्जी इनवॉइस और बोगस ई-वे बिल के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। एसटीएफ ने 50 -50 हजार के दो इनामी वांछित अभियुक्तों को नई दिल्ली के हरि नगर इलाके से गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई संतकबीरनगर जनपद के कोतवाली खलीलाबाद में दर्ज मुकदमा संख्या 577/25 (BNS की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट और जीएसटी एक्ट की धारा-132) के तहत की गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सौरभ अग्रवाल (निवासी द्वारका, नई दिल्ली) और अजीत कुमार (निवासी कैलापुरी एक्सटेंशन, नई दिल्ली) के रूप में हुई है।
दिल्ली के क्लॉक टावर से हुई गिरफ्तारी
पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यूपी के विभिन्न जिलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्में बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट बेचने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में संतकबीरनगर की ‘यादव एंटरप्राइजेज’ नामक फर्जी फर्म के मामले में बीते फरवरी महीने में दो आरोपियों (संदीप कुमार और अमन उपाध्याय) को जेल भेजा गया था, जबकि सौरभ और अजीत फरार चल रहे थे।
एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल के पर्यवेक्षण और निरीक्षक शैलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में मुख्य आरक्षी मुनेन्द्र सिंह, वीर प्रताप, अजीत सिंह और चालक सुरेश कुमार की टीम इन इनामी अपराधियों की तलाश में जुटी थी। खुफिया इनपुट के आधार पर एसटीएफ ने स्थानीय विवेचक को साथ लेकर वेस्ट दिल्ली के हरि नगर थाना क्षेत्र स्थित क्लॉक टावर के पास से दोनों को धर दबोचा। आरोपियों के पास से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि वे दिल्ली में अकाउंटेंसी से जुड़ा काम करते थे। इसी की आड़ में उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक पूरा नेटवर्क तैयार किया। ये शातिर अपराधी कूटरचित (जाली) दस्तावेजों के सहारे फर्जी फर्में रजिस्टर करते थे। बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के ही ये बोगस सेल्स इनवॉइस और फर्जी ई-वे बिल तैयार कर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड कर देते थे।
फर्जी इनवॉइस को असली दिखाने के लिए ये लोग बैंक खातों के माध्यम से रकम को एक बोगस फर्म से दूसरी फर्म में ट्रांसफर करते थे। बाद में सर्कुलर ट्रेडिंग (कागजी हेरफेर) या कैश के जरिए उस पैसे को ठिकाने लगा दिया जाता था। आरोपियों के पास इन फर्जी फर्मों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड का पूरा एक्सेस रहता था, जिससे वे आसानी से ओटीपी प्राप्त कर करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन को अंजाम दे रहे थे। दिल्ली और सीमावर्ती राज्यों में नेटवर्क फैलाकर इन्होंने भारी मात्रा में टैक्स चोरी की है।

