UP का लोनी बना सबसे प्रदूषित शहर, पाकिस्तान की हवा बेेहद खतरनाक
Sandesh Wahak Digital Desk: कल्पना कीजिए, आप सांस ले रहे हैं और वही हवा जो आपको जिंदा रखनी चाहिए, धीरे-धीरे आपके फेफड़ों को खोखला कर रही है। यह कोई फिल्म का सीन नहीं, बल्कि स्विट्जरलैंड की मशहूर कंपनी IQAir की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 की चौंकाने वाली हकीकत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान दुनिया का सबसे प्रदूषित देश बन गया है, जबकि भारत छठे स्थान पर है। लेकिन शहरों की बात करें तो हमारी स्थिति और भी चिंताजनक है। दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 5 भारत में हैं।
एशिया और अफ्रीका की हवा सबसे खतरनाक
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे प्रदूषित देशों की लिस्ट कुछ इस तरह है।
पाकिस्तान
बांग्लादेश
ताजिकिस्तान
चाड (अफ्रीका)
कांगो (अफ्रीका)
भारत
यह रिपोर्ट 143 देशों, क्षेत्रों और 9,446 निगरानी केंद्रों के डेटा से तैयार की गई है। अच्छी खबर? दुनिया के सिर्फ 14% शहर ही WHO के सुरक्षित स्तर (5 µg/m³) पर पहुंच पाए – जबकि पिछले साल ये 17% थे। सिर्फ 13 देश/क्षेत्र ही पूरी तरह सुरक्षित हवा वाले हैं– जैसे आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया और एस्टोनिया।
भारतीय शहरों की दर्दनाक हकीकत
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 5 भारत में हैं।
| रैंक | शहर | राज्य/क्षेत्र | PM2.5 स्तर |
|---|---|---|---|
| 1 | लोनी | उत्तर प्रदेश | 112.5 µg/m³ |
| 4 | दिल्ली | दिल्ली | – |
| – | बर्नीहाट | असम-मेघालय बॉर्डर | – |
| – | गाजियाबाद | उत्तर प्रदेश | – |
| – | उला/बीरनगर | पश्चिम बंगाल | – |
लोनी में PM2.5 का सालाना औसत 112.5 µg/m³ दर्ज किया गया – जो 2024 से 23% ज्यादा है और WHO के गाइडलाइन से 22 गुना ज्यादा! यानी वहां एक दिन की हवा 22 दिनों की साफ हवा जितनी खतरनाक है।
दिल्ली इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है। राजधानी की सड़कें, ट्रैफिक और धुंध हर साल नवंबर-दिसंबर में खबरों में छा जाती हैं। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के 25 सबसे प्रदूषित शहरों में से ज्यादातर भारत, पाकिस्तान और चीन में हैं – और टॉप-4 शहरों में से 3 भारत के!
पिछले साल से क्या बदला
54 देशों में PM2.5 बढ़ा
75 देशों में घटी
12 नए देश रिपोर्ट में शामिल
कुल 143 देशों का विश्लेषण
WHO का मैसेज साफ है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कहता है, सालाना PM2.5 5 µg/m³ से कम होनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर जगहें इससे कहीं ज्यादा हैं। PM2.5 के स्तर के अनुसार
0-5 µg/m³: सुरक्षित
5-15 µg/m³: मध्यम
15-30 µg/m³: अस्वास्थ्यकर
30-60 µg/m³: बहुत अस्वास्थ्यकर
60 µg/m³+: खतरनाक
यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, एक अलार्म है। बच्चों, बुजुर्गों और दिल-फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए यह हवा खासतौर पर खतरनाक है।
क्या कर सकते हैं हम
-पेड़ लगाएं – हरियाली बढ़ाएं
-पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें – निजी वाहन कम चलाएं
-EV (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा दें
-पटाखे बंद करें – त्योहारों पर प्रदूषण न बढ़ाएं
-N95 मास्क पहनें – बाहर निकलते वक्त
-घर में एयर प्यूरीफायर रखें
-बच्चों को सुबह-शाम बाहर खेलने से बचाएं
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