‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं’, पद से हटने के बाद राघव चड्ढा का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला

Sandesh Wahak Digital Desk: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद, शुक्रवार की सुबह सांसद राघव चड्ढा ने अपने ‘एक्स’ (Twitter) हैंडल पर एक वीडियो संदेश जारी कर सबको चौंका दिया है। राघव ने सीधे तौर पर अपनी ही पार्टी पर उनके ‘बोलने के अधिकार’ को छीनने का आरोप लगाया है।

क्या जनता की बात करना अपराध है?

वीडियो में राघव चड्ढा भावुक नजर आए और उन्होंने सीधे जनता से सवाल किया। उन्होंने कहा “आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को लिखित में सूचित किया है कि राघव चड्ढा को अब संसद में बोलने न दिया जाए। आखिर कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहता है?” राघव ने गिनाया कि उन्होंने हमेशा एयरपोर्ट पर महंगे खाने, डिलीवरी राइडर्स की समस्याओं, जोमैटो-ब्लिंकिट के मुद्दे, टोल प्लाजा की लूट और मिडिल क्लास पर टैक्स के बोझ जैसे विषयों को सदन में उठाया। “क्या मैंने कोई जुर्म किया है? इन मुद्दों को उठाने से पार्टी को फायदा ही हुआ, फिर मेरी आवाज क्यों बंद की जा रही है?”

पार्टी आलाकमान को सीधी चुनौती?

राघव चड्ढा ने अपने विरोधियों (पार्टी के भीतर) को चेतावनी भरे लहजे में संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “मेरी खामोशी को हार मत समझिए।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे उनका हाथ थामे रखें और इसी तरह समर्थन देते रहें।

क्यों हटाए गए राघव चड्ढा?

सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और राघव चड्ढा के बीच पिछले कुछ समय से तालमेल की कमी देखी जा रही थी। डिप्टी लीडर के पद से उनकी छुट्टी को पार्टी के भीतर ‘अनुशासनात्मक कार्रवाई’ या ‘रणनीतिक बदलाव’ के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन राघव के इस वीडियो ने इसे सीधे-सीधे ‘अधिकारों के हनन’ का मामला बना दिया है।

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