Kanpur News: किडनी रैकेट का पर्दाफाश, 10 लाख में खरीदी किडनी, 90 लाख में ट्रांसप्लांट

Sandesh Wahak Digital Desk: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े एक संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनकी किडनी कम कीमत पर ली जाती थी और फिर मरीजों को कई गुना अधिक रकम में ट्रांसप्लांट कराई जाती थी।

इस पूरे मामले में रावतपुर इलाके के एक निजी अस्पताल की भूमिका संदेह के घेरे में है। क्राइम ब्रांच ने देर रात छापेमारी कर अस्पताल संचालकों, एक डॉक्टर दंपती और एक बिचौलिये को हिरासत में लिया है।

शिकायत से खुला बड़ा नेटवर्क

मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई। जांच आगे बढ़ते ही पुलिस को अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के ठोस संकेत मिले। इसके बाद क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई तेज की।

शहर के अलग-अलग अस्पतालों में छापेमारी कर रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क एक-दो मामलों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर सक्रिय है।

10 लाख का लालच, 90 लाख का सौदा

जांच में सामने आया है कि कल्याणपुर क्षेत्र के आवास विकास-3 निवासी शिवम अग्रवाल ने उत्तराखंड के एक युवक को 10 लाख रुपये का लालच देकर किडनी देने के लिए तैयार किया।

युवक को बताया गया कि किडनी किसी रिश्तेदार के लिए ली जा रही है। आर्थिक तंगी के चलते वह राजी हो गया।

आरोप है कि रावतपुर के एक निजी अस्पताल में सर्जरी कर उसकी किडनी निकाली गई और बाद में मुजफ्फरनगर की 35 वर्षीय महिला के परिजनों को 90 लाख रुपये से अधिक में ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध कराई गई।

हालांकि, डोनर को पूरी रकम नहीं मिली—उसे 6 लाख रुपये नकद और 3.5 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि बाकी पैसे के लिए उसे लगातार टाल दिया गया।

ऑपरेशन के बाद अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट

सर्जरी के बाद डोनर और मरीज को करीब एक दिन तक उसी अस्पताल में रखा गया, फिर दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया।

पुलिस को शक है कि यह तरीका नेटवर्क को छिपाने के लिए अपनाया जाता था। कार्रवाई के दौरान शहर के कई अस्पतालों में दस्तावेजों और मरीजों के रिकॉर्ड की जांच की गई।

पहचान छिपाने का शक

पूछताछ में डोनर ने पहले खुद को मेरठ का निवासी बताया, बाद में बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला होना स्वीकार किया।

उसने बताया कि मेरठ में रहते हुए उसकी मुलाकात बिचौलिये से हुई थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पहचान बदलने और दस्तावेजों में गलत जानकारी क्यों दी गई।

50 हजार के विवाद से खुलासा

इस रैकेट का भंडाफोड़ 50 हजार रुपये के भुगतान विवाद से हुआ। तय रकम से कम पैसे मिलने और बाकी रकम न मिलने पर डोनर ने पुलिस में शिकायत की। यही शिकायत पूरे नेटवर्क के उजागर होने की वजह बनी।

सूत्रों के मुताबिक, इसी तरह के अन्य मामलों में भी कम कीमत पर किडनी लेकर उन्हें महंगे ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।

कई लोग हिरासत में, जांच जारी

फिलहाल अस्पताल संचालकों, डॉक्टर दंपती और बिचौलिये से पूछताछ जारी है। स्वास्थ्य विभाग भी समानांतर जांच कर रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि नेटवर्क का दायरा बड़ा निकला, तो और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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