Kanpur News: MBA की फीस के लिए किडनी तस्करी, ऐसे हुआ काले कारोबार का पर्दाफाश
Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में मानव अंगों की तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन को हिला कर रख दिया है। बिहार के समस्तीपुर निवासी आयुष, जो मेरठ में रहकर एमबीए की पढ़ाई कर रहा था, फाइनल ईयर की फीस जुटाने के लिए ऐसे जाल में फंस गया, जहां से निकलना उसके लिए मुश्किल हो गया।
किडनी का सौदा और मजबूरी में फंसा छात्र
आयुष की किडनी का सौदा 9 लाख रुपये में तय हुआ था, लेकिन उसे अब तक केवल 5 लाख रुपये ही मिले हैं। बाकी 4 लाख रुपये की मांग करने पर इस पूरे काले कारोबार का खुलासा हुआ। बताया जा रहा है कि जिस मरीज को किडनी दी गई, उससे करीब 60 लाख रुपये तक वसूले गए। इस पूरे खेल में डोनर को बेहद कम रकम दी जाती थी, जबकि बड़ी राशि डॉक्टरों, अस्पतालों और बिचौलियों के बीच बांटी जाती थी।
इस गिरोह का सरगना शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काना बताया जा रहा है, जो एक नर्सिंग होम में वार्डबॉय है, लेकिन खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को फंसाता था। इसके बाद आहूजा नर्सिंग होम में सर्जरी कराई जाती और ऑपरेशन के बाद डोनर और रिसीवर को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था। इस मामले में डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा और शिवम अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
STF और स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी
जांच में सामने आया है कि इस अवैध ट्रांसप्लांट को वैध दिखाने के लिए आयुष को किडनी लेने वाली महिला का दूर का भाई बताया गया। कागजों में हेरफेर कर इस पूरे मामले को ‘इमोशनल डोनेशन’ का रूप दिया गया, ताकि कानून की नजर से बचा जा सके।
मामले के खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ, विजिलेंस, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। शहर के कई बड़े अस्पतालों में छापेमारी की गई है और कई डॉक्टरों व अस्पताल संचालकों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
पीड़ित आयुष ने सुनाई आपबीती
आयुष ने बताया कि उसे अपनी एमबीए की फीस भरनी थी और घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। शिवम ने उसे 9 लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद पैसे देने में टालमटोल की गई। उसने आरोप लगाया कि उसे डराया-धमकाया गया और फर्जी कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए।
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