KGMU परिसर से हटेंगी अवैध मजारें, नोटिस और सुनवाई के बावजूद नहीं मिले कागजात

Lucknow News: राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में स्थित छह मजारों को लेकर चल रहा विवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद मजारों के प्रबंधकों की ओर से मालिकाना हक का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। इसके बाद अब इन अवैध ढांचों पर कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

दस्तावेज दिखाने में नाकाम रहे प्रबंधक

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परिसर में बनी मजारों के प्रबंधकों को दो बार नोटिस जारी कर जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज और कानूनी स्वामित्व के सबूत मांगे थे। प्रशासन के मुताबिक, केवल न्यू ऑर्थोपेडिक विभाग वाली मजार की तरफ से जवाब आया, लेकिन उसमें भी जमीन आवंटन का कोई वैध कागज नहीं था। बाकी पांच मजारों के प्रबंधकों ने नोटिस का संज्ञान तक नहीं लिया और न ही कोई सुबूत पेश किया।

सुनवाई में भी कोई नहीं पहुंचा

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करते हुए केजीएमयू प्रशासन ने सभी पक्षों को अपनी बात रखने का आखिरी मौका दिया था।

रमजान की वजह से बढ़ी तारीख: पहले यह सुनवाई 28 फरवरी को होनी थी, लेकिन रमजान के पवित्र महीने को देखते हुए इसे बढ़ाकर 4 अप्रैल कर दिया गया था।

खाली रहा कलाम सेंटर: शनिवार को कलाम सेंटर में केजीएमयू के अधिकारी दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक सुनवाई के लिए बैठे रहे, लेकिन छह मजारों में से किसी का भी प्रतिनिधि वहां अपनी बात रखने नहीं पहुंचा।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अपनी ओर से सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत आदेश जारी कर रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। चूंकि कोई भी पक्ष मालिकाना हक साबित नहीं कर सका, इसलिए अब इन निर्माणों को अवैध मानकर हटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

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