किडनी कांड: लखनऊ के नामी अस्पतालों पर मेहरबानी, डॉक्टरों का नाम आने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग खामोश
Sandesh Wahak Digital Desk: कानपुर के किडनी रैकेट के तार सबसे ज्यादा लखनऊ और एनसीआर से जुड़े हैं। तकरीबन आधा सैकड़ा किडनियां अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट करके करोड़ों की काली कमाई करने वाले बड़े डॉक्टर अभी भी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर हैं।
किडनी ट्रांसप्लांट की भी जांच जरूरी
खासतौर से लखनऊ के नामी अस्पतालों को मानो इस जांच से दूर रखने के प्रयास हो रहे हैं। तभी इन अस्पतालों के ऊपर किसी भी प्रकार की छापेमारी नहीं शुरू हुई है। बीते वर्षों में लखनऊ के निजी अस्पतालों में किये गए किडनी ट्रांसप्लांट की भी गहराई से जांच जरुरी है।
दरअसल किडनी काण्ड का प्रमुख आरोपी डॉ. रोहित इस खेल से शुरू से जुड़ा है। यह डॉक्टर लखनऊ और एनसीआर में बताया जा रहा है। गाजियाबाद में पुलिस ने पूर्व में छापेमारी भी की। लेकिन लखनऊ के ठिकाने पहुंच से दूर हैं। डॉ. रोहित ही किडनी रोगियों को कानपुर भेजता था। इस मामले में जेल गये आहूजा हॉस्पिटल के कर्मी शिवम अग्रवाल ने अहम जानकारियां पूछताछ में उगली हैं।
नामी अस्पताल का बड़ा सर्जन भी किडनी रैकेट का प्रमुख हिस्सा
हाल ही में पुलिस को पुख्ता सूचना मिली है कि लखनऊ के नामी अस्पताल का बड़ा सर्जन भी किडनी रैकेट का प्रमुख हिस्सा है। कानपुर पुलिस ने लखनऊ सीएमओ को पत्र भी भेजा है। इसके बावजूद लखनऊ के नामी अस्पतालों को लेकर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान बना हुआ है। जबकि रैकेट से कई छोटे-बड़े अस्पताल जुड़े हो सकते हैं। संकेत मिलते हैं कि राजधानी तक जांच पहुंचने से मानो रोका जा रहा है। किडनी काण्ड के जरिये आये धन से लखनऊ में सम्पत्तियां खरीदे जाने का भी अंदेशा है।
किडनी रैकेट के तार हवाला से भी जुड़े होने का अंदेशा है। विदेशी मरीजों से धन इसी रास्ते से डॉक्टरों के पास आया होगा। आरोपियों का लाखों रुपयों के साथ वीडियो वायरल हो रहा है। लेकिन ईडी अंजान है। मनीलांड्रिंग का ऐंगल जुडऩे के बावजूद अभी तक ईडी ने इस प्रकरण में दर्ज एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) पंजीकृत करने की पहल नहीं की है। जबकि इस खेल से कई शहरों के अस्पताल साफ तौर पर जुड़े हैं।
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