Lucknow News: 15 साल से फरार आजीवन कारावास का कैदी अयोध्या से गिरफ्तार

Lucknow News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर एक बेहद सनसनीखेज और बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। संयुक्त टीम ने गुजरात की बड़ोदरा जेल से पिछले 15 वर्षों से फरार चल रहे शातिर अपराधी और हत्या के दोषी घनश्याम वर्मा को अयोध्या से धर दबोचा है। पकड़ा गया आरोपी साल 2008 में गुजरात की एक फर्टिलाइजर कंपनी में सुरक्षा गार्ड की हत्या कर करोड़ों की डकैती डालने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और पैरोल/इलाज के दौरान पुलिस कस्टडी से चकमा देकर फरार हो गया था।

सुरक्षा गार्ड की हत्या कर डाली थी डकैती

इस पूरे मामले की शुरुआत 16 फरवरी, 2008 को हुई थी, जब गुजरात के भरूच जिले में स्थित गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कंपनी में सुरक्षा गार्ड की बेरहमी से हत्या कर डकैती की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस मामले में भरूच पुलिस ने घनश्याम वर्मा उर्फ करन उर्फ बाबा (मूल निवासी गोंडा, उत्तर प्रदेश) को गिरफ्तार किया था। 1 सितंबर, 2009 को न्यायालय ने घनश्याम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। उसे पहले जूनागढ़ और बाद में बड़ोदरा जेल में शिफ्ट किया गया था।

सिपाही को धक्का देकर हो गया था फरार

बड़ोदरा जेल में सजा काटने के दौरान 2 जनवरी, 2011 को तबीयत बिगड़ने पर घनश्याम को इलाज के लिए एसएसजी हॉस्पिटल बड़ौदा ले जाया गया था। वहां उसने अपनी सुरक्षा में तैनात सिपाही को जोरदार धक्का दिया और कस्टडी से फरार हो गया। इस फरारी के बाद उसके खिलाफ बड़ौदा के रावपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद साल 2013 में वलसाड जिले के वापी टाउनशिप थाने में भी उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक और केस दर्ज हुआ। तभी से गुजरात पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

लंबे समय से चकमा दे रहे इस इनामी कैदी को पकड़ने के लिए गुजरात पुलिस ने यूपी एसटीएफ से मदद मांगी थी। एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक विमल कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एक स्पेशल टीम का गठन किया गया। सर्विलांस और जमीनी इनपुट के आधार पर निरीक्षक ज्ञानेंद्र कुमार राय और दीपक सिंह की टीम को भनक लगी कि आरोपी अयोध्या में छिपा हुआ है। शनिवार, 4 जुलाई, 2026 को दोपहर करीब 1:10 बजे यूपी एसटीएफ और वलसाड पुलिस के उपनिरीक्षक संदीप आर. सुसलादे की संयुक्त टीम ने सआदतगंज बाईपास (थाना कैंट, अयोध्या) स्थित कैलाश टायर (सीएट) एजेंसी पर अचानक छापेमारी कर घनश्याम को दबोच लिया।

पूछताछ में आरोपी घनश्याम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह महज 14 साल की उम्र में अपने पिता के साथ पंजाब के लुधियाना चला गया था, जहाँ उसने गाड़ियों की व्हील बैलेंसिंग का काम सीखा। इसके बाद वह सूरत (गुजरात) आ गया और अपराधियों के संपर्क में आकर हत्या व डकैती की वारदात को अंजाम दिया। साल 2011 में जेल से भागने के बाद वह सीधे अमृतसर भाग गया और वहाँ नाम बदलकर मोटर मैकेनिक का काम करने लगा। कोरोना काल के दौरान वह अमृतसर से चुपचाप अपने पैतृक गांव गोंडा आ गया और हालात सामान्य होने पर पिछले 2-3 साल से अयोध्या की टायर एजेंसी में मैकेनिक बनकर अपनी पहचान छिपाए हुए था।

ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात ले जाने की तैयारी

कैंट थाना अयोध्या में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गुजरात पुलिस के उपनिरीक्षक संदीप आर. सुसलादे द्वारा आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात ले जाने की विधिक कार्यवाही की जा रही है, ताकि उसे दोबारा जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

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