Lucknow News: बिजली संकट पर अखिलेश यादव का तीखा हमला, बोले- ‘बीजेपी विधायकों की चिट्ठियां दिखावटी’
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में बीते कई दिनों से जारी बिजली संकट को लेकर सियासत तेज हो गई है। Akhilesh Yadav ने इस स्थिति को “महा विद्युत आपदा” करार देते हुए राज्य की Bharatiya Janata Party सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि बिजली संकट से उपजे जनाक्रोश को देखते हुए बीजेपी के विधायक और सांसद अपनी ही सरकार को जो पत्र लिख रहे हैं, वे केवल दिखावटी हैं और जनता के गुस्से से खुद को बचाने का प्रयास भर हैं।
सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक लंबे पोस्ट में Akhilesh Yadav ने कहा कि असहनीय बिजली कटौती से प्रदेश की जनता त्रस्त है।
ऐसे में बीजेपी के जनप्रतिनिधियों की चिट्ठियां किसी जनहित की पहल नहीं, बल्कि “डूबते जहाज” से निकलकर भविष्य के चुनावों में विपक्ष से टिकट पाने के लिए आवेदन पत्र जैसी हैं।

‘परिवारवाले ही समझ सकते हैं लोगों की तकलीफ’
अखिलेश यादव ने कहा कि इस भीषण गर्मी में बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बीमारों, बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवारों के भीतर झुलसते हालात और रोजमर्रा की परेशानियों को वही लोग समझ सकते हैं, जो इसे प्रत्यक्ष झेल रहे हैं।
सरकार के भीतर कलह का आरोप
बिना किसी का नाम लिए अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के भीतर अंदरूनी खींचतान की ओर भी इशारा किया।
उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान के बजाय जिम्मेदार लोग केवल नारेबाजी कर बच निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि “डबल इंजन” सरकार की आपसी टकराहट का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास अवसर है कि वह पूरी तरह नाकाम साबित हो चुके लोगों को जिम्मेदारी से हटाए, ताकि प्रशासनिक स्तर पर सुधार की गुंजाइश बने।
‘खजाना भरने में जुटी है सरकार’
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार को यह अहसास हो चुका है कि वह दोबारा सत्ता में नहीं आने वाली, इसलिए जनता की परेशानियों की अनदेखी कर केवल अपने “खजाने भरने” में लगी है।
अपने बयान के अंत में उन्होंने नारा देते हुए कहा, “जन-जन कहे आज का, भार बन गई भाजपा!”
गौरतलब है कि इससे पहले भी अखिलेश यादव बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma पर निशाना साध चुके हैं।
उन्होंने बिजली संकट के लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों, बिजली विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

