हाईकोर्ट की सख्ती के बाद लखनऊ मेयर ने सपा पार्षद ललित तिवारी को दिलाई शपथ

Lucknow News: इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद आखिरकार लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने समाजवादी पार्टी के पार्षद ललित तिवारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिला दी है। खास बात यह है कि तीन दिन पहले ही अदालत ने आदेश की अवहेलना करने पर मेयर के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी थी, जो इस शपथ ग्रहण के संपन्न होते ही दोबारा बहाल हो गए हैं।

लालबाग स्थित नगर निगम मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पहले सभी लोग राजकुमार हॉल में जुटे थे, लेकिन बाद में महापौर ने अपने निजी चैंबर में शपथ कराने का फैसला लिया। नगर आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में फैजुल्लागंज वार्ड से नवनिर्वाचित घोषित ललित तिवारी का आधिकारिक तौर पर कार्यकाल शुरू हो गया।

साल 2023 के निकाय चुनाव से जुड़ा है विवाद

यह पूरा विवाद वर्ष 2023 के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों से उपजा है। उस वक्त फैजुल्लागंज वार्ड से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप कुमार शुक्ला ने सपा के ललित तिवारी को 1,672 मतों से शिकस्त दी थी। इस परिणाम को चुनौती देते हुए ललित तिवारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी दूसरी शादी की बात छिपाई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता से जांच की और आरोपों को सही पाते हुए भाजपा प्रत्याशी की जीत को अमान्य (रद्द) घोषित कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने दूसरे स्थान पर रहे ललित तिवारी को ही इस वार्ड का वैध विजेता घोषित करते हुए उन्हें तत्काल शपथ दिलाने का निर्देश जारी किया था।

शपथ ग्रहण प्रक्रिया में हुई लंबी देरी को लेकर मेयर सुषमा खर्कवाल ने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले वह मुंबई में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने गई थीं, जिसमें देश के कई महापौर और नगर आयुक्त शामिल हुए थे। वहां से लौटने के बाद उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया, जिसके चलते उन्हें मिलिट्री हॉस्पिटल (सेना के अस्पताल) में भर्ती होना पड़ा। शनिवार की शाम को जैसे ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया, उन्होंने अगले ही दिन यानी रविवार सुबह कार्यालय पहुंचकर शपथ ग्रहण की औपचारिकता पूरी कर दी।

महापौर ने यह भी जोड़ा कि सामान्यतः ऐसे मामलों में निर्वाचन रद्द होने के बाद दोबारा वोटिंग (उपचुनाव) कराई जाती है, लेकिन चूंकि अदालत का सीधा आदेश दूसरे नंबर के उम्मीदवार को शपथ दिलाने का था, इसलिए नगर निगम ने इसका पूरा सम्मान किया। वहीं, शपथ लेने के बाद सपा पार्षद ललित तिवारी ने इसे सत्य और न्याय की बड़ी जीत बताया और अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को दूर करने का संकल्प दोहराया। आपको बता दें कि इस संवेदनशील मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अगली सुनवाई आगामी 29 मई को होनी तय है।

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