उत्तराखंड-हिमाचल बॉर्डर पर आधी रात को भारी बवाल, बैरिकेड्स तोड़ देवभूमि में घुसे निहंग सिख

Sandesh Wahak Digital Desk: चमोली के कर्णप्रयाग में हुई एक पुरानी हिंसक घटना को लेकर उपजा आक्रोश गुरुवार रात एक बार फिर भड़क उठा। मोहाली से उत्तराखंड के कर्णप्रयाग की तरफ बढ़ रहे निहंग सिखों के एक बड़े जत्थे और उत्तराखंड पुलिस के बीच हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे कुल्हाल बॉर्डर पर आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए 15 से 20 निहंग सिख जबरन उत्तराखंड की सीमा के भीतर घुस गए। इसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए बल प्रयोग किया और कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें खदेड़कर वापस हिमाचल प्रदेश की सीमा में धकेल दिया।

वार्ता फेल होने के बाद रात 10 बजे बढ़ा तनाव

निहंग सिखों के 25 जून के कूच के ऐलान को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले ही कुल्हाल बॉर्डर को अभेद्य किले में तब्दील कर रखा था। सीमा पर भारी पुलिस बल के साथ ही पैरामिलिट्री फोर्स (अर्द्धसैनिक बल) की तैनाती की गई थी। बॉर्डर पर पहुँचने के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने निहंगों को कानून-व्यवस्था का हवाला देकर रोकने के लिए कई दौर की बातचीत की, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। रात करीब 10 बजे संवाद का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और दोनों पक्षों के बीच भारी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते कुछ निहंगों ने बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका और आगे बढ़ गए, जिन्हें पुलिस ने मुस्तैदी से काबू किया।

क्या है इस फसाद की असल जड़

इस पूरे टकराव की पटकथा बीती 16 जून को कर्णप्रयाग में लिखी गई थी। श्री हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा से वापस लौट रहे निहंग श्रद्धालुओं और कर्णप्रयाग के स्थानीय निवासियों के बीच किसी विवाद को लेकर हिंसक मारपीट हुई थी। इस मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। निहंगों का यह पूरा जत्था उन्हीं चार साथियों की बिना शर्त रिहाई और इस कार्रवाई के विरोध में कर्णप्रयाग जाने पर अड़ा है।

हम यहाँ कोई जंग लड़ने नहीं आए हैं, बल्कि भाईचारा और प्यार बढ़ाने आए हैं। अगर कोई भूल हुई भी है, तो हम माफी मांगते हैं। हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि प्रशासन समझौता करे और जेल में बंद हमारे चार साथियों को रिहा कर पंजाब भेजे। जब तक वे हमारे साथ नहीं होंगे, हम वापस नहीं मुड़ेंगे। -अकाली जसदीप सिंह, निहंग प्रतिनिधि

पुलिस पूरी तरह अलर्ट, उपद्रवियों पर कड़ी नजर

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कुल्हाल बैरियर और गुरुद्वारा पांवटा साहिब में निहंगों के जिम्मेदार प्रतिनिधियों के साथ कई बार शांति वार्ता की गई थी। अधिकांश सिख श्रद्धालु पुलिस की बात मान गए थे, लेकिन 15-20 युवकों के एक उग्र समूह ने जबरन दूसरे बैरियर को तोड़कर राज्य में घुसने का प्रयास किया। एसएसपी ने दोटूक कहा कि पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रोक दिया है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। फिलहाल पूरे बॉर्डर क्षेत्र में हाई अलर्ट है।

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